सहारनपुर। उद्यान विभाग गेंदे के फूल की खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान देगा। जनपद में इसके लिए 14 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से सात हेक्टेयर लघु एवं सीमांत किसानों और सात हेक्टेयर सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए होगा। जनपद में करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेंदे की खेती होती है।
जनपद के नागल, बलियाखेड़ी, नकुड़ और पुंवारका विकास खंड में गेंदे के फूल की सर्वाधिक खेती होती है। उद्यान विभाग इसके खेती को प्रोत्साहित करने में जुटा है। इसके लिए लघु एवं सीमांत श्रेणी के किसानों को 16 हजार रुपये और सामान्य श्रेणी के किसानों को 10 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान दिया जाएगा। दोनों ही श्रेणियों के लिए सात-सात हेक्टेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य रखा गया है। गेंदे की खेती करने वाले राजेंद्र, दुर्गा प्रसाद, राजकुमार, ओमपाल और संजय कुमार आदि का कहना है कि गेंदे की खेती किसान के लिए काफी लाभकारी रहती है। यहां के किसान आमतौर पर पूसा नारंगी, पूसा बसंती और अफ्रीकन टाल आदि प्रजातियों की खेती करते हैं। जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि जिले में करीब 150 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेंदे की खेती होती है। इसकी रोपाई अगस्त, जनवरी और मार्च में होती है। इसकी अवधि आमतौर पर चार महीने की रहती है। जिले में इस फूल की औसत उपज 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो जाती है। जबकि औसतन रेट 30 रुपये प्रति किलो तक रहता है।
यहां जाते हैं बिक्री के लिए फूल
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि जनपद में फूलों की खेती पॉलीहाउस के अलावा सामान्य खेतों में भी होती है। अधिकांश फूल बिक्री के लिए स्थानीय मंडी के साथ ही हरिद्वार, दिल्ली, अंबाला, चंडीगढ़ और देहरादून की मंडियों में जाते हैं।
एक नजर में जिले में फूलों की खेती
फूल-----------------क्षेत्रफल
गेंदा--------------150 हेक्टेयर
ग्लैडियोलस-------55 हेक्टेयर
रजनीगंधा--------50 हेक्टेयर
गुलाब--------------25 हेक्टेयर
उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक।