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डाक भेजने में कभी होता था घोड़ों और हाथी का इस्तेमाल

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ोस्टल संग्राहलय में रखे हाथी के दांत - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। जमाना बदलने के साथ डाकघर भी अत्याधुनिक हो गया है, लेकिन कभी डाक हाथी और घोड़ों के जरिए भी दूर-दराज इलाकों में पहुंचाई जाती थी। जनपद के पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर में बने में संग्रहालय में आज भी पुरानी यादों से जुड़े दस्तावेज इसके गवाह हैं।
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संचार क्रांति के साथ ही डाक व्यवस्था के तरीके भी बदल गए। बदलाव आया तो चिट्ठी की जगह ईमेल, मेसेज, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्मों ने ले ली। पहले डाक विभाग को भी डाक पहुंचाने में कई-कई दिन लग जाते थे, लेकिन अब कम से कम तीन दिन में डाक को पहुंचा दिया जाता है। इसके साथ ही स्पीड पोस्ट पर ऑनलाइन ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई है। स्पीड पोस्ट करते ही पल-पल की अपडेट पोस्ट भेजने वाले व्यक्ति के मोबाइल फोन पर मेसेज के जरिए मिलती रहती है। इसके अलावा पूरा सिस्टम ऑनलाइन हो गया है।
संग्रहालय में मिलते हैं अहम प्रमाण, घुंघरू बजाता था डाकिया
आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कभी हाथी और घोड़ों के जरिए भी डाकिए दूर-दराज के इलाकों में डाक लेकर जाते थे। इसके प्रमाण अंबाला रोड स्थित पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर में बने संग्रहालय में मिलता है, जहां पर उस हाथी के दांत की जोड़ी भी रखी, जिसने 20 साल तक डाक विभाग की सेवा की थी।
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दरअसल, पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर में दो संग्रहालय हैं। एक संग्रहालय में डाक विभाग में प्राचीन समय से प्रयोग होने वाले पोस्ट बॉक्स, डाकिए के बैग, घड़ी, मुहर, नेम प्लेट, वजन तोलने में प्रयुक्त होने वाले बाटों में अंग्रेजी शासन से लेकर दशमलव पद्धति के समय तक प्रयोग किए बाट, जिनमें पौंड, सेर और तोला भी रखे हुए हैं। अंग्रेजी शासनकाल में पोस्टमैन एक विशेष प्रकार के बाजे का प्रयोग भी करते थे। इसके साथ संग्रहालय में घुंघरू युक्त भाला भी रखा है, जिसको बजाते हुए डाकिया चलता था।
संजोकर रखे हैं देश-विदेश के टिकट
संग्रहालय में भारत में आजादी से पहले और उसके बाद जारी किए तमाम टिकटों के अलावा अन्य देशों के टिकट भी मौजूद है। इसके अलावा प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के डाक विभाग में खुलवाए खाते के प्रमाण भी यहां मौजूद हैं। प्रमाण के रूप में उनके हस्ताक्षर वाली डायरी रखी हुई है।
संचार क्रांति के बाद डाक व्यवस्था में अनेक बदलाव हो गए, लेकिन संग्रहालय में पुरानी यादों से जुड़े अनेक दस्तावेज रखते हुए हैं। - सुनील राय, निदेशक, पोस्टल ट्रेनिंग सेंटर

पोस्टल संग्राहलय में रखे टिकट- फोटो : SAHARANPUR

पोस्टल संग्राहलय में रखे बांट माप यंत्र- फोटो : SAHARANPUR

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