सात साल से परिसीमन में उलझा नगर निगम का चुनाव नई सरकार में होने की उम्मीद बढ़ गई है। चुनाव कराने से पहले सरकार को परिसीमन की स्थिति साफ करनी होगी। वर्षों से चुनाव होने की बाट जोह रहे भाजपा नेताओं ने नगर निगम के चुनाव का मामला सरकार बनते ही मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की तैयारी भी कर ली है।
बसपा सरकार ने वर्ष 2009 में 32 नए गांवों को शहर में जोड़ते हुए सहारनपुर को नगर निगम का दर्जा दिया था। बसपा सरकार नगर निगम का चुनाव कराने की तैयारी कर ही रही थी कि 2012 का विधान सभा चुनाव आ गया था। इसके बाद प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन की वजह से चुनाव लटक गया। समाजवादी पार्टी का मानना था कि बसपा ने दलित बहुल गांवों को शामिल किया है, जिसका लाभ वह नगर निगम के चुनाव में उठा सकती है। इसकी वजह सपा के शासनकाल में चुनाव लटका रहा।
दिसंबर 2016 में गांव शेखपुरा कदीम समेत 12 नए गांवों को नगर निगम में शामिल करने की अधिसूचना जारी की गई। मगर, शेेखपुरा कदीम के ग्राम प्रधान समेत कई स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया। अभी तक भी परिसीमन की स्थिति साफ नहीं हो सकी है।
मगर उम्मीद है कि प्रदेश में बनने वाली भाजपा सरकार परिसीमन को फाइनल कर चुनाव कराएगी। इतना ही नहीं चर्चा है कि वर्षों से नगर निगम के चुनाव का इंतजार कर रहे भाजपाइयों ने सरकार बनते ही सबसे पहले सरकार के समक्ष नगर निगम के चुनाव का मामला रखने की तैयारी भी कर ली है।