सहारनपुर। हिंदी भाषा को लेकर युवाओं में बहुत से ऐसे हैं जो हिंदी को मात्र भाषा नहीं, बल्कि मां समान मानते हैं। गर्व महसूस करते हैं हिंदी को लेकर। अमर उजाला फाउंडेशन के अभियान हिंदी हैं हम के तहत ऐसे युवाओं से बात की गई जो हिंदी साहित्य से पीएचडी और परास्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।
हिंदी से मिला पुत्रवत स्नेह : मोहित
ग्राम फंदपुरी निवासी मोहित संगम गुरुकुल कांगड़ी विवि से हिंदी साहित्य से पीएचडी कर रहे हैं। मोहित कहते हैं कि हिंदी केवल भाषा मात्र नहीं है, बल्कि हिंदी हमारी मां है, जिसने हमें पुत्रवत स्नेह देकर सांसारिक जगत का आभाष कराया है। अगर हमारे देश में कोई युवा हिंदी बोलने में शर्म महसूस करता है तो ये हिंदी का दुर्भाग्य नहीं है, बल्कि उस विश्वगुरु हिंदुस्तान का दुर्भाग्य है, जिसने अपना ज्ञान, धन, वैभव लुटाकर पूरे विश्व का मागदर्शन किया है। मेरी आज जो पहचान है, वह हिंदी से है।
मातृ शक्ति निभाए मातृभाषा के लिए जिम्मेदारी : दिव्या
ग्राम नंदी फिरोजपुर निवासी एमए हिंदी की छात्रा दिव्या कहती हैं कि मेरे पूर्व जन्मों के कोई शुभ कार्य रहे होंगे, जो आज मुझे हिंदी साहित्य की विद्यार्थी होने का गौरव प्राप्त है। देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली भारत की राष्ट्र भाषा हिंदी जन-जन की भाषा है। विश्व की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली मातृशक्ति के रूप में भी हमारा दायित्व बनता है कि हम उस भाषा का प्रचार प्रसार करें, जो देश के विकास में सहायक हो।
मातृभाषा को खोकर कोई खुश नहीं रह सकता : राहुल
छात्र राहुल पसरिचा कहते हैं कि हिंदी हमारे हिंदुस्तान की छत है, हिंद का गौरव है। मैं गर्व महसूस करता हूं जब किसी अंग्रेजी का प्रयोग करने वाले को हिंदी भाषा के माध्यम से संतुष्ट करता हूं। मैं अपनी समस्त कविताएं हिंदी में लिखना पसंद करता हूं, हिंदी में अपनी भावनाएं व्यक्त करना मेरे लिए बहुत आसान होता है।
- हिंदी हैं हम -- मोहित संगम, पीएचडी (शोधरत)- फोटो : SAHARANPUR
हिंदी हैं हम -- राहुल पसरीचा- फोटो : SAHARANPUR