सहारनपुर में बीमारी और मौत का कारण बन चुकी वेस्ट यूपी की नदियों की सफाई को लेकर शुरू हुए अभियान में सहारनपुर को बड़ी सौगात मिलने वाली है। हिंडन और काली नदी को स्वच्छ करने से पहले केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय पांवधोई और ढमोला की सफाई की रूपरेखा तय करेगी।
कारण, शहर के बीच से गुजरने वाली पांवधोई और ढमोला का पानी हिंडन में मिलता है। यही कारण है कि शहर के बीच से गुजर रही इन नदियों में स्वच्छ जल के जरिए हिंडन में प्रवाह और स्वच्छता की कोशिश की जाएगी।
इस परियोजना को मूर्त रुप देने के लिए सबसे पहले पांवधोई और ढमोला में गिरने वाले नालों को चिन्हित किया जाएगा। नदी में गिरने वाले नालों में ही छोटे-छोटे एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाया जाएगा।
इस पूरी योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सितंबर-अक्तूबर में इस परियोजना पर जमीनी काम शुरू हो जाएगा।
केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी नमामि गंगे परियोजना के तहत शुरू हुई नदियों की सफाई अभियान में सहारनपुर की पांवधोई और ढमोला के दिन भी बहुरने की उम्मीद है।
तमाम कवायद के बाद यह बात सामने आई है कि बिना पांवधोई और ढमोला की सफाई के हिंडन के स्वच्छता की बात करना बेमानी होगी। यही कारण है कि केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने पहले चरण में पांवधोई और ढमोला को स्वच्छ करने का निर्णय लिया है।
इसमें पांवधोई और ढमोला में गिरने वाले नालों को चिन्हित किया जाएगा। इसमें बड़े नालों और छोटे नालों को अलग-अलग चिन्हित कर उन्हें सीधे एसटीपी से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
पांवधोई के उद्गम स्थल से लेकर शहर के बाहर तक नालों में एसटीपी के जरिए इस नदी की सफाई की जाएगी। ऐसा ही ढमोला को स्वच्छ करने के लिए कवायद की जाएगी। इसके अलावा नदी में बाहरी कचरे को रोकने के लिए भी योजना पर काम किया जा रहा है।
आपको बता दें कि हिंडन और काली नदी की स्वच्छता के लिए केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री डा. संजीव बालियान ने सोमवार को दौरा किया था। इसके बाद अब इसकी कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है जिससे राहत की उम्मीद है।
सहारनपुर की गंगा कही जाने वाली पांवधोई नदी का उद्गम गांव शकलापुरी से हो रहा है। यह नदी बाबा लालदास घाट के पास शहर में एंट्री करती है। यहीं से ही इसमें कॉलोनियों से निकलने वाली गंदे नाले और सीवर के पाइप छोड़े हुए हैं।
घाट से ढमोला नदी में गिरने तक पांवधोई में डेढ़ सौ से अधिक नाले और सीवर के पाइप छोड़े गए हैं, जिनकी वजह से इसका अविरल पानी लगातार दूषित हो रहा है।
पुल खुमरान और जामा मस्जिद के सामने फल और सब्जी बेचने वाले भी ज्यादातर लोग शाम को दुकानों से कचरा इकट्ठा कर नदी में फेंकते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम ने पुल खुमरान के पास कचरा प्वाइंट बनाया हुआ है।
यहां कचरे का नियमित उठान न होने की वजह से कचरा जमा होकर पांवधोई में गिरता है। यह भी पांवधोई के दूषित होने की एक वजह है। सबकुछ सहते और झेलते हुए पांवधोई नदी राकेश सिनेमा के पास ढमोला नदी में मिलती है।
ढमोला नदी की हालत पांवधोई से भी बदतर है। ढमोला नदी के किनारे अनेक डेयरियां चल रही हैं। इसके अलावा गंगोह बस अड्डे के लिए पुराने समय में आवंटित की गई जमीन पर भारी मात्रा में गोबर और शहरभर का कचरा डाला जा रहा है।
बरसात के दिनों में यह गोबर और कचरा घुलकर ढमोला नदी में समा जाता है। इसके बाद ढमोला दूषित होकर हिंडन नदी में मिलता है। ऐसे में साफ है कि पांवधोई और ढमोला नदी को साफ किए बगैर प्रदूषणरहित हिंडन की कल्पना तक करना बेमानी है।