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मदरसों के संबंध में हाईकोर्ट का फैसला संविधान की जीत : मदनी

Wed, 21 Jan 2026 12:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
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देवबंद। बिना मान्यता वाले मदरसों के संचालन को वैध बताए जाने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय संविधान की सर्वोच्चता और सांविधानिक मूल्यों की जीत है।
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मौलाना महमूद मदनी ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने मदरसों को लेकर दिए फैसले में स्पष्ट किया है कि महज मान्यता न होने की बुनियाद पर किसी मदरसे को बंद कर देना, सील करना या उसकी पढ़ाई रोकना कानूनन गलत है। यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के मदरसा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके चलते प्रशासन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर सके। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला सरकारों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए साफ संदेश है जो दीनी मदरसों और मकतबों (छोटे मदरसे) को बंद करने जैसे कदमों को अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रहे थे।
मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत श्रावस्ती जनपद के 30 मदरसों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में पक्षकार भी रही है और उत्तराखंड सरकार के रवैये के खिलाफ भी कानूनी संघर्ष कर रही है। हाईकोर्ट के इस फैसले से जमीयत के इन प्रयासों को मजबूती मिली है।
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उन्होंने मदरसा संचालकों से आह्वान किया कि वह अपने आंतरिक प्रबंधन और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाते रहें, ताकि विरोध करने वालों को कोई बहाना न मिले।
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