सहारनपुर में कागजी खानापूर्ति में माहिर सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से हर साल जिले में बुखार, मलेरिया और डेंगू से सैकड़ों मौतें होती है। मगर, जनपद का मलेरिया विभाग केवल स्लाइड बनाने और दवा बाटने तक सीमित रह गया है।
बीमारी के सीजन में भी विभागीय अधिकारी सुस्त रवैया अपनाकर केवल कागजी घोड़े दौड़ाने में लगे है। हालात ये हैं कि अस्पताल में ही गंदगी की भरमार है। बाकी की तो बात ही क्या है।
जिला अस्पताल में स्थित मलेरिया विभाग में कुल 19 अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत है। प्रतिदिन सुबह 10 बजे कार्यालय में सभी की हाजिरी लगती है। इसके बाद अधिकारी सीएमओ कार्यालय, एडी कार्यालय और जिलाधिकारी कार्यालय तक चक्कर काटने में व्यस्त रहते हैं।
शेष समय कार्यालय में बैठकर शासन को रिपोर्ट भेजने में बिताते है। जनपद में दो मलेरिया इंस्पेक्टर है। इन दोनों का काम तभी शुरू होता है जब किसी क्षेत्र में मलेरिया फैलने की आशंका होती है।
विभागीय सूत्र बताते है विभाग में हर दिन बड़ी संख्या में मलेरिया से ग्रस्त मरीज पहुंचते है। लेकिन विभाग में रखी मशीनें खराब है। जिनके कारण जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है।
ऐसे में मलेरिया के मरीज घटने के बजाय हर दिन तेजी से बढ़ रहे है। हर साल मलेरिया के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक रोगी जान गंवाते हैं। कस्बों में भी लगभग ऐसे ही हालात हैं। इसके बावजूद विभाग गंभीर नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर नजर डाले तो मलेरिया के केस में हर वर्ष तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। मलेरिया का असर शरीर के हर अंग पर पड़ता है। मरीज कोमा तक में चला जाता है। जनपद में हर साल मलेरिया से बीमार होने वाले मरीजों की लंबी कतार है। कई मरीजों की तो जान तक चली गई।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि जागरूकता के अभाव में मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जागरूकता के बिना इस बीमारी से छुटकारा संभव नहीं है। जिला मलेरिया अधिकारी डा. शिवांका गौड़ का कहना है कि यह बीमारी मरीजों को कोमा तक में पहुंचा देती है।
थोड़ी सी सावधानी बरतने मात्र से इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है। लापरवाही के चलते ही यह बीमारी जन्म लेती है। मलेरिया की पहली स्टेज में सर्दी लगती है। उसके बाद बुखार आकर तेजी से पसीना आता है। सिर दर्द, उल्टी, दर्द आदि के लक्षण भी रहते है।
ये हो सकते हैं मलेरिया के दुष्प्रभाव
- मलेरिया में प्लेटलेट्स कम हो जाती है।
- गुर्दे फेल हो सकते हैं।
- एनीमिया हो सकता है।
- सांस फूल सकता है।
- शरीर में पानी और सोडियम की कमी हो जाती है।
- जिगर पर असर डालकर पीलिया कर देता है।
ऐसे करें बचाव
- मच्छरों से बचने के लिए उपकरणों का उपयोग करें।
- घर के आसपास गंदा पानी इकट्ठा न होने दें।
- नालियों में इंसेक्टीसाइड दवा का छिड़काव करें।
- घर के आसपास जमा पानी में दो-तीन चम्मच मिट्टी का तेल डालें।
- कूलर में पानी लम्बे समय तक न भरकर रखें।
- छत पर पड़े टायरों और बर्तनों का पानी इकट्ठा न होने दें।