सहारनपुर। रविवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस है। जिले में हेपेटाइटिस (पीलिया) पैर पसार रहा है। सात महीने के अंदर हेपेटाइटिस बी और सी के 602 मरीज मिल चुके हैं, जिनका उपचार चल रहा है। दवा का स्टॉक एक महीने का रह गया है। इसमें समय से जांच कराने और इलाज से ही जान बच सकेगी।
दरअसल, हेपेटाइटिस बी और सी, जिसे सामान्य भाषा में पीलिया कहा जाता हैै एक गंभीर बीमारी है। यदि समय से जांच और इलाज कराया जाए तो मरीज के ठीक होने की संभावना अधिक रहती है। लापरवाही बरतने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। एसबीडी जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार वोहरा ने बताया कि सामान्य पीलिया दवाओं से ठीक हो जाता है, लेकिन हेपेटाइटिस बी और सी खतरनाक पीलिया होता है, जो लीवर पर अटैक करता है। ऐसे में जरूरी है कि कोई भी लक्षण नजर आने पर चिकित्सक से संपर्क करें। नोडल अधिकारी शिवांका गौड़ ने बताया कि एक जनवरी से अब तक जिले में हेपेटाइटिस बी के 106 और हेपेटाइटिस के 496 मरीज मिल चुके हैं। 8729 स्क्रीनिंग की गई।
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मुफ्त मिलती है दवा, लेकिन स्टॉक में कम
एसबीडी जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस बी और सी की दवाएं मुफ्त मिलती है, लेकिन इस समय दवा का स्टॉक एक महीने का रह गया है। मरीजों को कोई दिक्कत न आए। इसलिए अस्पताल की ओर से तीन महीने की दवा मंगाने के लिए डिमांड भेज दी है। जल्द दवा मिलने की उम्मीद है।
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हेपेटाइटिस के लक्षण
- पेशाब का पीला आना और थकान रहना।
- बुखार तथा त्वचा और आंखों में पीलापन होना।
- जोड़ो में दर्द और डायरिया होना।
- भूख नहीं लगना तथा जी कच्चा रहना और उल्टी आना।
- वजन कम होना और पेट में दर्द होना।
हेपेटाइटिस से बचाव
- दूषित पानी और दूषित भोजन करने से बचें।
- भोजन करने से पहले हाथों को अच्छे से धुलें।
- हेपेटाइटिस बी का टीका जरूर लगवाएं।
- इस्तेमाल की गई सुई से इंजेक्शन न लगवाएं।