फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दीन की खातिर हजरत इमाम हुसैन ने दी कुर्बानी

विज्ञापन
मुहर्रम की तीसरी तारीख पर आयोजित मजलिस में इमामबारगाह सामानियान में विचार रखते फरहत मेहंदी काजम - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। मुहर्रम की तीसरी तारीख को शहर की विभिन्न इमामबारगाहों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मजलिस हुई। मौलाना ने करबला के शहीदों की शहादत पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन

रविवार रात आयोजित मजलिसों में डॉ. आमिर अब्बास ख्वाजा, रईस अब्बास, आसिफ अलवी, अथर अली जैदी, सलीस हैदर काजमी ने मरसिया पढ़ी। मोहल्ला कायस्थान स्थित इमामबारगाह में फरहत मेहंदी काजमी, मोहल्ला जाफरनवाज स्थित बड़ी इमामबारगाह में मौलाना इजहार हैदर और छोटी इमामबारगाह में सालिम काजमी ने खिताब फरमाया। उन्होंने कहा कि यजीद हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से समर्थन लेना चाहता था। वह चाहता था कि यदि रसूल अकरम का नवासा उसका समर्थन कर देगा तो वह तमाम मुसलमानों का सरदार बनकर सारे काम जायज कर देगा, जो इस्लाम में नाजायज हैं और उन बातों पर हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की मुहर लग जाएगी। इस तरह इस्लाम की शक्ल बदल जाएगी और उसकी हुकूमत भी कायम रहेगी। यही उसका मकसद था। यजीद को हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने समर्थन नहीं किया। उनको नाना रसूले खुदा के दीन (धर्म) की हिफाजत करनी थी। इसके लिए हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने 10 मुहर्रम को कुुर्बानी देकर दीन को बचा लिया, नहीं तो इस्लाम में गलत काम भी जायज हो जाते। इस लिए हमें हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत को कभी भूलना नहीं चाहिए। मजालिस के आखिर में अंजुमन ए अकबरिया व अंजुमन ए इमामिया ने नौहाखानी व मातम किया। उधर, अधिवक्ता मंजर हुसैन के घर पर हुई मजलिस में जाकिर हुसैन अजहर काजमी ने खिताब फरमाया। इसके अलावा गाइडलाइन को देखते हुए शिया समुदाय के लोगों ने अपने घरों पर भी मजलिस की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें