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बंदी की मौत पर परिजनों और ग्रामीणों का पुलिस लाइन में हंगामा

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बंदी की मौत पर परिजनों और ग्रामीणों का पुलिस लाइन में हंगामा
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सहारनपुर। चोरी के आरोप में जिला जेल में बंद अनुसूचित जाति के सितार सिंह की मेरठ मेडिकल कालेज में उपचार के दौरान मौत होने पर बुधवार को परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस लाइन में हंगामा किया। ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरसावा पुलिस ने पहले उसे थर्ड डिग्री दी, उसके बाद जेल और फिर जिला चिकित्सालय में सही उपचार नहीं मिल पाया। इसके चलते उसकी मौत हो गई। एसपी देहात विद्या सागर मिश्र, एसपी सिटी विनीत भटनागर सहित अन्य अफसरों ने मजिस्ट्रेटी जांच का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत कर लौटाया।
बसपा के पूर्व जिला अध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद, जिलाध्यक्ष योगेश कुमार, लियाकत अली, विनोद तेजियान, नरेश गौतम, अधिवक्ता राजकुमार, पुनीता गौतम, अमरीश चौटाला सहित परिजन और ग्रामीण बुधवार को पुलिस लाइन पहुंचे। ग्रामीणों ने एसपी देेहात को बताया कि सितार सिंह को दो मार्च को चोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। आरोप लगाया कि सरसावा थाना प्रभारी अशोक सोलंकी और अन्य पुलिस कर्मचारियों ने सितार सिंह के साथ मारपीट की। थर्ड डिग्री से उसकी हालत बिगड़ गई। सरकारी अस्पताल में उसका साठगांठ से मेडिकल बनाकर जेल भेज दिया गया। जेल अस्पताल में भी उसे सही उपचार नहीं मिला। इसके बाद आठ मार्च को जिला चिकित्सालय भेज दिया गया और यहां से मेरठ मेडिकल भेजा गया। वहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सितार सिंह की हालत के बारे में परिजनों को कभी सही सूचना नहीं दी गई।
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दूसरे वर्ग के लोगों पर भी मारपीट का आरोप
सितार सिंह के पिता सिताब सिंह ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार होने से पहले गांव के दूसरे वर्ग के चार युवकों ने उसके पुत्र को पकड़कर बुरी तरह पीटा था। इसके बाद पुलिस को सौंपा था।
पहले न्याय, फिर करेंगे अंतिम संस्कार
परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस अफसरों के सामने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। एसपी देहात विद्या सागर मिश्र और एसपी सिटी विनीत भटनागर सहित अन्य अधिकारियों के काफी समझाने के बाद ग्रामीण शांत हुए।
मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी : मिश्र
हंगामा कर रहे लोगों को समझाते हुए एसपी देहात ने आश्वासन दिया कि इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाएगी।
लीवर सोराइसिस से पीड़ित था बंदी : शर्मा
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश शर्मा का कहना है कि बंदी सितार सिंह का सही से उपचार कराया जा रहा था। पहले जिला जेल के अस्पताल में इलाज कराया। वहां हालत न सुधरने पर मेरठ मेडिकल भेजा गया, जहां उसकी मौत हुई है। वह ड्रग एडिक्ट था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लीवर डैमेज आया है। उसे लीवर साइरोसिस की गंभीर बीमारी बताई गई है। जेल प्रशासन की ओर से कोई लापरवाही नहीं की गई है।
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उत्पीड़न के आरोप निराधार : सोलंकी
सरसावा थाना प्रभारी अशोक सोलंकी का कहना है कि दो मार्च को ही आरोपी को जेल भेज दिया था। आरोपी को कुछ लोग पकड़कर लाए थे। सितार सिंह के पास से चोरी का सामान भी बरामद हुआ था। पुलिस पर पिटाई करने के आरोप निराधार हैं।
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