सहारनपुर। त्याग, तपस्या और वात्सल्य की मूर्ति आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर महाराज ने धर्म के जयकारों के बीच नगर में पर्दापण किया। आचार्य श्री के पदप्रक्षाल्लन और आरती कर आशीष पाने के लिए श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया। आचार्य ने जीओ और जीने दो को व्यवहार में ग्रहण करने का आह्वान किया।
आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज आज सुबह जैन मंदिर आवास विकास में पहुंचे जहां जैन समाज के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। दिल्ली रोड पर सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने अपने निवास के बाहर आचार्य श्रीपद् प्रक्षाल्लन कर आर्शीवाद प्राप्त किया।
इसके बाद आचार्य श्री ज्ञान सागरर महाराज चंद्रनगर स्थित अहिंसा भवन पहुंचे, जहां श्रद्वालुओें के उमड़े सैलाब ने उनकी चरण वंदना कर अपने भाग्य को सराहा। जेवी जैन रोड पर पुलिस लाइन के निकट जैन समाज के जिनेंद्र कुमार जैन, राजेश जैन, सचिन जैन, आशीष जैन, शिफाली जैन, राशि जैन, शिखा जैन, विशाल जैन, रोजल जैन, पायस जैन आदि ने महाराजश्री की आरती उतारी और आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री ने अपने ज्ञान यपी गंगा में श्रद्धालुओं को सराबोर करते हुए कहा कि जिसका मन कमजोर है उसका जीवन कमजोर है और मन शक्तिशाली है तो पूरा जीवन शक्तिशाली है।
जीवन एक धर्मशाला की तरह है। जीवन में दृढनिश्चय जितना संकल्पित होगा उतना ही जीवन लक्ष्य प्राप्ति में सहजता होगी। आचार्य श्री ने कहा कि संघर्ष के बिना कोई जीवन महान नहीं बनता है। जब तक हथौडे़ से वार नहीं होगा तब तक पत्थर भी भगवान का आकार नहीं लेता है। आचार्य श्री ने अपने मंगल वचनों की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि आज की विडंबना ये है कि हम जीवन तो जीना चाहते हैं। लेकिन जीवन की बैट्री को चार्ज नहीं करते हैं। यदि मंदिर नहीं जाएंगे तो जीवन कैसे सहजता से गतिमान होगा।
इस दौरान जैन समाज के अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि सहारनपुरवासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि 25 वर्षों के अंतराल के बाद आचार्य श्री के दर्शन व सानिध्य का अवसर प्राप्त हुआ है। एके जैन, चौधरी संदीप जैन, प्रवीण जैन, अनुज जैन, सुशील जैन, प्रकाश जैन, श्रवण जैन, अनिल जैन, विशाल जैन, राकेश जैन, अजय जैन, राजीव जैन, अविनाश जैन, अरूण जैन, वीर कुमार जैन, दीपक जैन, चंद्र जैन, कुलभूषण जैन आदि रहे।