सहारनपुर में प्रकृति से हो रही छेड़छाड़ का लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिले में लगातार प्रकृति का दोहन जारी है। कहीं फैक्ट्रियों से निकलने वाले अवशिष्ट नदियों में मिलकर हमारे जीवन में जहर घोल रहा है तो कहीं गाड़ियों से निकलने वाला धुआं पर्यावरण में प्रदूषण फैला रहा है।
कुल मिलाकर यह हमारी पृथ्वी को दूषित बनाता है। यही कारण है कि सहारनपुर के ज्यादातर हिस्सों में भूजल प्रदूषित हो चुका है और गांव के गांव बीमारी की चपेट में है।
दरअसल धरती को बचाने का आशय है इसकी रक्षा के लिए पहल करना। सहारनपुर की बात करें तो न ही इसे लेकर कभी सामाजिक जागरूकता दिखाई गई और न राजनीतिक स्तर पर कभी कोई ठोस पहल की गई।
हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला पृथ्वी दिवस अब महज औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं बचा है। कई बार सर्वे से यह बात उजागर हो गई कि फैक्ट्रियों से निकलने वाला अवशिष्ट के नदियों और भूजल में जाने से वहां से निकलने वाला पीने का पानी भी दूषित हो गया है।
भूजल भी चर्म रोग, आंतों के रोग, पेट रोग, लीवर रोग और कैंसर की बीमारी बढ़ाने वाला पाया जा चुका है। सबसे बुरी हालत को यहां से गुजर रही हिंडन नदी की है।
इसके पानी में ऑक्सीजन का लेवल 2.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से गिरकर 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर यानी न के बराबर पहुंच चुका है। इस जल में जीवन की बेहतर संभावना के लिए ऑक्सीजन का यह लेवल 6 से 7 मिलीग्राम प्रति लीटर का होना चाहिए।
इस नदी के चारों ओर पांच किलोमीटर तक की आबादी में आने वाले गांवों में इसके असर का सबसे अधिक खतरा है। भूमिगत जल प्रदूषित होने से यहां कैंसर ही नहीं अन्य घातक बीमारियां बढ़ रही हैं और आगे भी बढ़ेंगी।
वायु और जल प्रदूषण पर गंभीर नहीं ः सहारनपुर। वायु और जल प्रदूषण बढ़ रहा है। दोनों ही समस्याओं पर यहां का जिला प्रशासन गंभीर नहीं है। शहर और देहात की फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित जल बिना ट्रीटमेंट के ही नदियों और जमीन अंदर डाला जा रहा है।
वाहनों की संख्या बढ़ने और चिमनियों से निकलने वाले धुआं से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। मगर, प्रशासन इसके प्रति गंभीर नहीं है।