सहारनपुर/गंगोह। कुंडाबसी गांव स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट की तीन बड़ी वजह सामने आई है। घटनास्थल पर जिस तरह चार कमरों में विस्फोटक सामग्री और पटाखे रखे हुए थे उससे लग रहा है कि वहां पर क्षमता से अधिक भंडारण था। दूसरी वजह है कि फैक्टरी के लिए लाइसेंस जरूर था, लेकिन इसके अलावा कोई अन्य मानक पूरा नहीं था। तीसरी और सबसे अहम वजह है प्रशासनिक अनदेखी। यदि जिम्मेदार अधिकारी फैक्टरी का मौका मुआयना समय पर कर लेते तो शायद दो जान बच सकती थी।
पहली वजह :
फैक्टरी करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने बताया कि फैक्टरी के पास 2028 तक का लाइसेंस है। जानकारी करने पर पता चला कि लाइसेंस 15 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री के लिए लाइसेंस लिया गया था, लेकिन फैक्टरी में चार कमरे हैं और चारों में विस्फोट सामग्री और पटाखे रखे हुए थे। कुछ पटाखे बाहर धूप में सूखने के लिए भी रखे गए थे। वह 15 किलोग्राम से कहीं ज्यादा थे। आसपास के ग्रामीणों ने बताया कि फैक्टरी में पिछले कुछ दिनों से हलचल बढ़ गई थी। दीपावली के लिए बड़ी संख्या में पटाखे की खेप तैयार की जा रही थी।
दूसरी वजह :
नियमानुसार, फैक्टरी शहर या आबादी वाली जगहों से दूर और खुले खेतों या औद्योगिक क्षेत्र में होनी चाहिए, लेकिन यह फैक्टरी गांव से मात्र 300 मीटर दूर है। इमारतों में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल होना चाहिए, जो चिंगारी न छोड़े। फर्श पर एंटी-स्टेटिक रबर मैट होने जरूरी हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं दिखा। केवल सामान्य कमरे बनाए गए थे। आग बुझाने के यंत्र, पानी की टंकी, रेत की बोरियां और फायर अलार्म सिस्टम हर समय तैयार हालत में होने चाहिए, लेकिन यहां पर अग्निशमन यंत्र के नाम पर केवल एक उपकरण दिखाई दिया। इसके अलावा सबसे अहम है कि मजदूरों को आग से बचाने वाले सूती कपड़े, सेफ्टी गॉगल्स और विशेष जूते होने चाहिए। इस फैक्टरी में किसी भी मजदूर के पास ऐसा कुछ नहीं था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि फैक्टरी को लाइसेंस किस आधार पर मिला हुआ था। ठेकेदार सभी मजदूरों को लेकर आए थे। नियमानुसार उनके श्रमिक आधार पर बीमा होना चाहिए, लेकिन मजदूरों ने बताया कि किसी का बीमा नहीं है।
तीसरी वजह :
तीसरी वजह प्रशासनिक अनदेखी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ साल पहले भी फैक्टरी में आग लगी थी। हालांकि उसमें कोई जनहानि नहीं हुई थी। मामले को रफा दफा कर दिया गया था। अगर अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई होती तो शायद यह हादसा नहीं होता। एनसीआर से बाहर होने की वजह से जिले में पटाखा फैक्टरी की संख्या काफी है। अग्निशमन या अन्य विभाग की तरफ से दीपावली के नजदीक निरीक्षण की औपचारिक कार्रवाई होती है। बाकी दिनों में किसी का कोई ध्यान नहीं। यहीं वजह रही कि फैक्टरी में इस तरह मानकों की अनदेखी की गई और यह हादसा हुआ।
एक महीने पहले ही आए मजदूर
पटाखा फैक्टरी में काम करने के लिए मजदूर करीब एक महीने पहले ही काम करने के लिए आए थे। इनमें एक मजदूर अभी सात दिन पहले ही काम पर लौटा। जांच में सामने आया कि फैक्टरी में काम करने वालों की उम्र करीब 19 से 30 साल है, जो कई सौ किलोमीटर दूर मजदूरी करने के लिए आए। वहीं, मृतक दीपराज और संदीप की अभी शादी नहीं हुई थी।
बारूद का गलत मिश्रण बन सकता है विस्फोट की वजह
जेवी जैन कॉलेज के फिजिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजय कुमार मौर्य के अनुसार, पटाखे बनाने में मुख्य रूप से पोटेशियम नाइट्रेट, सल्फर (गंधक) और चारकोल (कोयला) का उपयोग किया जाता है। पटाखे बनाते समय कई कारणों से विस्फोट हो सकता है। जैसे रॉ मैटेरियल की गलत हैंडलिंग, इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट, पुरानी वायरिंग, ओवरलोड की वजह से चिंगारी निकलना, गन पाउडर, सल्फर और पोटेशियम क्लोरेट आदि केमिकल को आपस में गलत तरीके से मिलाना या उनका तापमान बढ़ाना भी इसका कारण हो सकता है।
गनीमत रही, चपेट में नहीं आया मदरसा
हादसा स्थल से करीब 60 मीटर की दूरी पर मदरसा स्थित है, जिसमें करीब 100 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। बच्चों ने बताया कि हादसे के समय वह कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे। अचानक तेज धमाके की आवाज सुनकर सभी सहम गए और डर के कारण अंदर ही दुबक गए। गनीमत रही कि विस्फोट की आग और उसका असर मदरसे तक नहीं पहुंचा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे के बाद मदरसे में भी दहशत का माहौल रहा।
फैक्टरी के पास 15 किलोग्राम का लाइसेंस था। हादसे को लेकर जांच शुरू कर दी गई है। सभी मानकों की जांच की जाएगी। फैक्टरी मालिक से भी पूछताछ होगी।
-प्रताप सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी