फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आठ साल में 23 गुना बढ़ गई धान की सरकारी खरीद

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। जनपद में धान की सरकारी खरीद लगातार बढ़ रही है। पिछले आठ वर्षों में सरकारी खरीद करीब 23 गुना बढ़ गई है। वर्ष 2013-14 में जहां 421.98 मीट्रिक टन धान खरीदा गया था, जबकि इस साल अब तक 9760.812 मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। गत वर्ष जहां 496 किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचा था, इस बार यह संख्या 2902 हो चुकी है।
विज्ञापन

किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के लिए सरकार विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से धान की खरीद कराती है। इस बार सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868 और ग्रेड-1 किस्म के धान का 1880 रुपये प्रति क्विंटल घोषित है। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसान का पंजीकरण अनिवार्य है। धान का मूल्य किसान के बैंक खाते में जाता है। जिले के किसानों का रुझान लगातार सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने का बढ़ रहा है। इसके चलते जनपद में लक्ष्य का पांच गुना धान खरीद हो चुकी है। इस बार जिले का लक्ष्य 2000 मीट्रिक टन का था, जबकि खरीद 9760.812 मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है।
धान की बंपर खरीद हो रही है। खरीदे गए धान का 97 प्रतिशत भुगतान किसानों के खातों में भेजा जा चुका है। वर्ष 2014-15 में बाजार में अधिक भाव होने के कारण सरकारी केंद्रों पर खरीद बहुत कम हुई थी। - प्रिंस चौधरी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।
विज्ञापन

ये हैं सरकारी केंद्रों पर खरीद बढ़ने के कारण
सामान्य धान का दाम बाजार में 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि सरकारी केंद्र पर 1868 रुपये प्रति क्विंटल है।
कोरोना काल में धान बिक्री के लिए बहुत कम संख्या में ही किसान हरियाणा गए, जबकि पूर्व के वर्षों में बड़ी संख्या में किसान हरियाणा की यमुनानगर मंडी में जाते थे।
विज्ञापन

डिमांड कम होने की वजह से आढ़तियों ने भी सामान्य धान की खरीद कम की, जिससे दाम में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हो पाई।
जनपद में धान की सरकारी खरीद (मीट्रिक टन में)
वर्ष ------------------ खरीद
2013-14 ------------ 421.98
2014-15 ------------- 0.00
2015-16 ------------ 990.16
2016-17 ------------ 1482.11
2017-18 ------------ 806.87
2018-19 ------------ 1269
2019-20 ------------ 2042.60
2020-21 ----------- 9760.812
नोट: खाद्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें