सरसावा। सहकारी चीनी मिल सरसावा में शीरा चोरी प्रकरण की जांच के लिए सोमवार को शासन से नामित टीम सहारनपुर पहुंची। इस दौरान टीम ने हर बिंदु पर बारीकी से जांच की। जांच करने के बाद टीम रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
सरसावा सहकारी चीनी मिल में शीरा चोरी होने से लखनऊ तक खलबली मची है। यही कारण है कि शासन स्तर से सोमवार को मुरादाबाद मंडल के उप आबकारी आयुक्त राजेश शर्मा व जिला आबकारी अधिकारी रामपुर संजीव कांत शर्मा को सहारनपुर भेजा गया। दोनों अधिकारी सरसावा शुगर मिल पहुंचे, जिन्होंने शीरा चोरी के हर बिंदुओं की बारीकी से जांच की। शीरे की निगरानी में लगे कर्मचारियों से बात की। इसके अलावा मिल अधिकारियों से भी प्रकरण के बारे में जाना। टीम को जांच कर रिपोर्ट शासन स्तर पर भेजनी है।
वहीं, पुलिस चीनी मिल में लगे सीसीटीवी की जांच कर रही है। पुलिस की जांच इस बात पर भी चल रही है कि जब प्रधान प्रबंधक को 12 टैंकरों की सूची प्राप्त हुई तो यह ही सूची टाइम ऑफिस पर भी पहुंची होगी। जहां चीनी मिल में प्रवेश करने के लिए टैंकरों को ले जाना पड़ता है। सवाल यह है कि सूची में नंबर नहीं होने के बावजूद दो टैंकर किसके आदेश पर अंदर शीरा लेने गए। चीनी मिल के शीरा कार्यालय के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है कि कहीं पूर्व में भी इन्हीं टैंकरों से तो शीरा चोरी नहीं कराया गया।
सहकारी चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक राजकुमार मित्तल ने बताया कि शीरा चोरी प्रकरण की जांच पुलिस कर रही है। इससे पूर्व शीरा बिक्री की गहनता से जांच कराई जाएगी। इससे पता चलेगा कि यह शीरा चोरी का पहला मामला है या पूर्व में भी ऐसा हो चुका है।
यह था मामला
शनिवार को किसान सहकारी चीनी मिल सरसावा में अधिकृत रूप से शीरा लेने के लिए 12 टैंकर आए थे, लेकिन जब प्रधान प्रबंधक ने मौके पर जाकर जांच की तो पता लगा कि 12 के स्थान पर 14 टैंकर आए हुए थे। इसमें दो टैंकरों में चोरी से शीरा भरकर बाहर भेजने की तैयारी थी। मिल प्रबंधन की तहरीर पर पुलिस ने अपराध पंजीकृत करते हुए सहकारी चीनी मिल में तैनात आबकारी उप निरीक्षक अरविंद सिंह, शीरा कार्यालय लिपिक शिवकुमार, चोरी का शीरा लेने आए दो टैंकर चालकों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत करते हुए मेरठ की भ्रष्टाचार अदालत में पेश कर जेल भेज दिया था।