विरासत को बचाने का प्रयास : प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य हर्षदेव स्वामी का कहना है कि उक्त घंटा अंग्रेजों के समय का है। न जाने कितने प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और हजारों विद्यार्थियों ने उक्त घंटे की आवाज के साथ अपनी दिनचर्या को चलाया होगा। उनका मानना है कि यह पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई विरासत है, जिसको संभालने और पुन: इस्तेमाल में लाने की जरूरत है। इसीलिए घंटे को पुन: स्थापित कराया गया है।
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राजकीय इंटर कॉलेज ने 138 साल पुराने घंटे को संभालकर रखा यह अच्छी बात है। इससे भी अच्छी बात यह है कि विद्यालय इस घंटे को फिर से इस्तेमाल में ला रहा है। यह अच्छा प्रयास है, जिससे घंटे को और लंबे समय तक संभालकर रखा जा सकेगा।
- रवि दत्त, जिला विद्यालय निरीक्षक