देवबंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी और ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के मुख्य इमाम डॉ. उमैर अहमद इलियासी ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अपने खिलाफ जारी हुए फतवे पर नाराजगी जताई है, साथ ही कहा यह हम पर लागू नहीं होता। जिन्होंने फतवा दिया वह पाकिस्तान या किसी दूसरे इस्लामिक देश में जाकर अपने फतवे जारी करें।
अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के बाद ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के मुख्य इमाम डॉ. उमैर अहमद इलियासी के खिलाफ कुफ्र का फतवा जारी किया गया है। जिसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। मंगलवार को अमर उजाला से फोन पर बातचीत में दिल्ली निवासी डॉ. उमैर इलियासी ने कहा कि मुफ्ती साबिर हुसैनी नाम के कोई शख्स हैं, जिन्होंने सोशल मीडिया पर कुफ्र का फतवा जारी किया है। यह मुफ्तियों का कोई इंस्टीट्यूट चलाते हैं, लेकिन मैं इनको न ही जानता और न ही कोई इनसे मुलाकात हुई है। फतवे में उन्होंने यह भी लिखा है कि हम माफ करने वाले नहीं है। डॉ. उमैर इलियासी ने कहा कि यह फतवा हम पर लागू नहीं होता है। यह भारत है और यहां के संविधान के हिसाब से हम पर कुफ्र का फतवा लागू नहीं होता। सख्त लहजे में उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान या किसी दूसरे इस्लामिक देश में जाकर यह फतवे जारी करें। क्योंकि यह हिंदुस्तान हैं यहां सभी मजहब को मानने वाले लोग मिल जुलकर रहते हैं, सभी त्योहार आपस में मिलकर मनाते हैं और यही इस मुल्क की खूबसूरती है। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा से मोहब्बत के पैगाम को आम करने का काम किया है और आगे भी इस पैगाम-ए-मोहब्बत की मुहिम को जारी रखेंगे।
अमन के दुश्मन हैं फतवा जारी करने वाले: मुशर्रफ
देवबंद। डॉ. उमैर इलियासी के खिलाफ फतवा दिए जाने के मामले में आरएसएस के घटक दल मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के विभाग संयोजक राव मुशर्रफ ने कहा कि फतवे को अमन और भाईचारे के खिलाफ बताया है।
जारी बयान में राव मुशर्रफ ने कहा कि इमाम डॉ. उमैर इलियासी ने रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होकर इंसानियत का पैगाम दिया है। इस्लाम में मुल्क से मोहब्बत करने को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में रहने वाले इंसान के लिए उसका देश, वहां की संस्कृति और इंसानियत सर्वोपरि है। धार्मिक पूजा पद्धति ऊपर वाले को अपने-अपने अकीदे से याद करने के तरीके हैं, लेकिन किसी भी मजहब ने यह नहीं सिखाया कि दूसरे मजहब की निंदा करें।