सहारनपुर के नकुड़ के गांव ककराला में गन्ना विकास परिषद को आवंटित जमीन पर लगाई गई बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को पुलिस प्रशासन द्वारा हटाने के विरोध में दलितों ने मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर कई घंटे तक हंगामा काटा।
प्रदर्शनकारी दलित मूर्ति को वापस स्थापित कराये जाने तथा जमीन को अंबेडकर पार्क के नाम आवंटित कराये जाने की मांग पर अड़े रहे। दर्शनकारियों ने पुलिस तथा तहसील प्रशासन को करीब पांच घंटे तक नाकों चने चबाने को मजबूर कर दिया।
जाम से कई घंटे तक राहगीरों को धूप में भीषण गर्मी से जूझना पड़ा। एसडीएम हीरालाल सिंह यादव ने बताया कि गांव ककराला के ग्राम समाज की जमीन पर दो वर्ष पूर्व तत्कालीन ग्राम सभा की भूमि पर प्रबंध समिति ने गन्ना विकास परिषद के लिए कार्यालय बनवाने को जमीन का प्रस्ताव पारित किया था।
इस पर डीएम ने गत माह 28 अप्रैल को विधिवत गन्ना विकास परिषद को आवंटित करने के आदेश पारित कर दिए थे। गन्ना विकास परिषद के कर्मचारियों ने दो दिन पूर्व 25 मई को एसडीएम से मिलकर आवंटित जमीन की पैमाइश कर कब्जा दिलाए जाने की मांग की।
पुलिस तथा तहसील प्रशासन का कहना है कि इस बात की जानकारी गांव के दलितों को लगी तो उन्होंने बृहस्पतिवार की रात किसी समय आवंटित इस जमीन पर बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी।
सूचना पर हल्का लेखपाल तथा पुलिस ने शुक्रवार की सुबह प्रतिमा को हटवा दिया तथा पुलिस प्रतिमा को साथ ले गई। जैसे ही इसकी जानकारी गांव के दलितों को मिली तो बड़ी संख्या में औरतें, बच्चे तथा युवक मौके पर आए और हंगामा खड़ा कर दिया।
दलितों ने मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया तथा सड़क पर धरना देकर बैठ गए। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम हीरालाल सिंह ने दलितों को समझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन दलित प्रतिमा को उसी स्थान पर लगवाए जाने की मांग पर अडे़ रहे।
हालात बेकाबू होते देख थाना सरसावा, गंगोह, कुतुबशेर, महिला पुलिस थाना तथा रिजर्व पुलिस को भी मौके पर बुला लिया गया था। एसपी देहात जगदीश शर्मा और पूर्व ब्लाक प्रमुख ऋषिपाल ने दलितों को समझाया लेकिन वे नहीं माने।
करीब साढ़े चार घंटे तक जब जाम नहीं खुला तो पुलिस ने सख्ती कर दलितों को सड़क से हटाया। इसके बाद दलित पास के एक खेत में जाकर बैठ गए। दलित इस जमीन पर अंबेडकर की प्रतिमा लगवाए जाने तथा स्कूल के बच्चों के लिए क्रीड़ा का मैदान बनवाए जाने की मांग पर अड़ गए।
एसडीएम ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की सहमति से तय किया कि बिना अनुमति के उक्त भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाएगा।
इसके बाद दलित कोतवाली पहुंच कर अंबेडकर की प्रतिमा वापस करने की मांग करने लगे।
जिसे देने से पुलिस ने मना कर दिया। इसके बाद दलितों ने तय किया कि आवंटित जमीन को गन्ना परिषद से वापस लेने के लिए डीएम से मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों में राजपाल, आत्माराम, दर्शन, सतीश, देवकुमार, प्रमिला, सत्या देवी, विनय बीडीसी, शशी बीडीसी, मौसम देवी, राजेश्वरी तथा बिमलेश देवी आदि मौजूद रहे।