सहारनपुर। श्री राम मंदिर आंदोलन में सहारनपुर की अहम भूमिका रही है। 1990 में यहां देश के कई शीर्ष नेताओं ने आंदोलन को धार दी। जिले में विहिप, आरएसएस, भाजपा और हिंदू संगठनों के अलावा हजारों की संख्या में नागरिक आंदोलन से जुड़े रहे। सहारनपुर और कस्बा सरसावा उस समय सुर्खियों में आ गया था, जब भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया सहित 12 शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर किसान सहकारी चीनी मिल के अतिथिगृह में बनाई अस्थायी जेल में रखा था।
गंगा-यमुना के बीच बसा सहारनपुर श्री राम मंदिर आंदोलन का प्रत्यक्ष गवाह रहा है। वर्ष 1990 में पूरे देश में श्री राम मंदिर आंदोलन चरम पर था। तत्कालीन सरकार आंदोलन को दबाने में लगी थी, लेकिन राम भक्तों में पूरा जोश था और वह सिर्फ अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर बनते देखना चाहते थे।
वहीं, सहारनपुर से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गहरा नाता रहा है। वह कई बार यहां आए हैं। बात 24 अक्तूबर 1990 की है। तब अटल बिहारी वाजपेयी के साथ कई शीर्ष नेता पूरे देश के साथ ही पश्चिमी यूपी में आंदोलन की कमान संभालते हुए थे। अटल बिहारी वाजपेयी, विहिप अध्यक्ष विष्णु हरि डालमिया सहित 12 शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। सभी को चीनी मिल के अतिथि गृह में बनाई अस्थायी जेल में वर्ष 1990 में 24 अक्टूबर से पांच नवंबर तक रखा गया था।
पुरानी यादों को ताजा कर रहे चीनी मिल में लगे फोटो
सहकारी चीनी मिल में स्थित अतिथि गृह के सभागार में लगे फोटो पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं। उस समय यहां बंदी बनाकर रखे गए सभी नेताओं के फोटो लगे हैं। इसके साथ ही आंदोलन से संबंधित ब्योरा भी दर्ज है। फोटो में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, विहिप अध्यक्ष विष्णु हरी डालमिया, विहिप उपाध्यक्ष बीपी तोषनौवाल, कोषाध्यक्ष पुल्ला रेड्डी, भानुपुरा पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ, तत्कालीन सांसद गुमानमल, विहिप की अंतरराष्ट्रीय नेता अमेरिका निवासी अंजली बहन, रामनिवास ढंढारिया, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बसंत राय ओक, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव केदारनाथ साहनी, तिलकराज गुप्ता, जगतगुरु के शिष्य शिवकुमार और आरके गुप्ता दिख रहे हैं।
जेल में वाजपेयी और वरिष्ठ नेताओं से मिलने नहीं दे रही थी पुलिस
सरसावा निवासी नरेश बत्रा बताते हैं कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान सरसावा में कार सेवकों ने बंद का आह्वान किया था। तब वह और उनके साथी चीनी मिल की अस्थायी जेल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अन्य वरिष्ठ नेताओं से मिलने जा रहे थे। भगवान श्रीराम का जयकारा लगाते हुए टोली चल रही थी, तब पुलिस ने उन पर लाठियां फटकारी थीं। इसके बाद पुलिस ने सबको गिरफ्तार कर बुलंदशहर की जेल भेजा था। उनकाे दस दिन जेल में रखा गया था। दोबारा सरसावा पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें फिर गिरफ्तार किया था। तब, सहारनपुर जेल में पांच दिन रखा गया, लेकिन उनका संघर्ष बेकार नहीं गया और आज अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है। 22 जनवरी को होने वाली मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गर्व महसूस कर रहे हैं। (संवाद)