सहारनपुर में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा अलग-अलग तीन स्थानों से लिए गए दूध, रसगुल्ले और बतीसा के नमूने प्रयोगशाला की जांच में फेल पाए गए। सुनवाई के बाद न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन ने तीनों दुकानदारों पर 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है।
जिले के तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुधीर कुमार सिंह ने 3 जुलाई 2014 को शेखूपुर मुजाहिदपुर निवासी खाद्य कारोबार कर्ता इकबाल की जयंतीपुर मार्ग के पास खाद्य पदार्क मिश्रित दूध की दुकान से दूध विक्रय करते समय नमूना लिया गया।
मेरठ में हुई जांच में नमूना फेल पाया गया। उसमें 25 प्रतिशत की मिलावट पाई गई। जबकि आरोपी द्वारा अपना पक्ष रखा गया कि पशु आहार में 25 प्रतिशत मिलावट होने से दूध में 25 प्रतिशत की मिलावट दूध में आ सकती है।
उसने जानबूझकर किसी नियम कानून का उल्लंघन नहीं किया। न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन की कोर्ट ने आरोपी की दलील को नाकाफी मानते हुए 25000 रुपये का जुर्माना लगा दिया है।
दूसरा नमूना खाद्य सुरक्षा अधिकारी अशोक कुमार ने 9 जनवरी 2015 को रामपुर मनिहारन में मेन रोड पर मिठाई विक्रेता अनिल कुमार की दुकान से मैदा, चीनी, बेसन एवं खाद्य तेल से बने बतीसा का लिया गया।
मेरठ लैब में जांच के बाद उसमें सिंथेटिक कलर का प्रयोग पाया गया तथा गलत लेबल लगा हुआ पाया गया। एडीएम कोर्ट द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब भी नहीं दिया गया।
जिस पर न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन ने अनिल कुमार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया है। तीसरा नमूनो खाद्य सुरक्षा अधिकारी महेश कुमार त्रिपाठी ने 11 नवंबर 2015 को पिलखनी सरसावा निवासी किशोर कुमार सैनी की अंबाला रोड पिलखनी अड्डे पर स्थित दुकान से छेना के रसगुल्ले का लिया गया। मेरठ प्रयोगशाला में हुई जांच में रसगुल्ले में मिलावट पाई गई।
न्यायालय अपर जिला मजिस्ट्रेट प्रशासन ने किशोर कुमार सैनी पर छैना के रसगुल्ला में मिलावट का दोषी मानते हुए 50000 रुपये का जुर्माना लगाया है। तीनों मामलों में 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए 30 दिन में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। उसके बाद आरसी जारी करने की चेतावनी दी गई है।