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Saharanpur News: पानी उतरने के बाद बाढ़ पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ा

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-घरों और मोहल्लों में जमा दो से तीन फीट कीचड़ को खुद ही हटा रहे पीड़ित
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-छह से आठ फीट तक पानी घुसने से लोगों को लाखों रुपये का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बाढ़ प्रभावित कॉलोनियों से पानी उतरने के बाद पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। बाढ़ में राशन, फर्नीचर, कपड़ा बर्तन सब कुछ गंवा चुके परिवार अपने घरों और मोहल्लों की सफाई में खुद ही जुटे हैं। दो से तीन फीट की कीचड़ हटाने में उन्हें पसीने छूट रहे हैं।
महानगर में पंजाबी बाग, न्यू साकेत कॉलोनी, साकेत कॉलोनी, गंगापुरम, नंद विहार, विष्णुपुरम, कृष्णा विहार, देवपुरम, संत नगर, देवेंद्र नगर, गोविंद नगर, इंदिरा कॉलोनी, धोबीघाट से सटी विश्वास नगर, नाजिम कॉलोनी बाढ़ से प्रभावित हुईं। इनमें कईं कॉलोनियां ऐसी रहीं, जिनमें बने मकानों में छह से आठ फीट तक पानी रहा। लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस दौरान शासन से लेकर प्रशासन तक को बाढ़ पीड़िताें की चिंता रही, लेकिन पानी उतरने के बाद भी लोगों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। बाढ़ से घरों का फर्नीचर, कपड़े, बर्तन, राशन, बच्चों की किताबें सभी तरह का सामान खराब हो चुका है। करीब तीन दिन से लोग घरों और मोहल्लों में जमा कीचड़ और कचरे को हटाने में जुटे हैं।
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नहीं पहुंचा स्वास्थ्य विभाग
बाढ़ का पानी उतरने के बाद कॉलोनियों में दुर्गंध फैली हुई है। जलभराव और सीलन के कारण मच्छरों का प्रकोप और बढ़ गया है। मगर अभी तक नगर निगम के कर्मचारी साफाई करने, एंटी लार्वा का छिड़काव करने नहीं पहुंचे हैं। उधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अभी तक नहीं पहुंची है। इसे लेकर साकेत निवासी सोनू, विपिन गुप्ता, अजय कुमार सिंह, विनय कुमार त्यागी, पीयूष ने नाराजगी जताई।
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पीड़ितों की बात
-बाढ़ पीड़ित राजेश गुप्ता का कहना है कि घर से पानी निकल गया है, लेकिन सारा सामान खराब हो चुका है। खाने को राशन नहीं है और सोने के लिए बिस्तर नहीं। वहीं रसोई की हालत ऐसी नहीं है कि उसमें खना बनाकर बैठकर खाया जा सके।
साकेत निवासी श्याम सिंह पुंडीर का कहना है कि यह प्राकृतिक आपदा थी, जिसमें लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जिस प्रकार सरकार किसानों को मुआवजा देती है बाढ़ पीड़ितों को भी दिया जाना चाहिए।
अंकित शर्मा का कहना है कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी कॉलोनियों का भ्रमण कर केवल आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि पीड़िताें को समस्याओं से खुद लड़ना पड़ रहा है।
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सुषमा ने बताया कि वह कश्मीरी पंडित हैं, जिनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। किसी तरह की मदद अभी तक नहीं पहुंची है। घर का सभी जरूरी सामान खराब हो चुका है। घरों में जलरीले कीड़े घुसे हैं।
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