सहारनपुर। जिले में फाइनेंसरों का जाल हर तरफ फैला हुआ है, जो मनमाफिक ब्याज तो वसूलते ही हैं, साथ ही जो लोग समय पर किस्त जमा नहीं करते, उन्हें परेशान किया जाता है। विकास भी फाइनेंस कंपनियों का शिकार हुआ। कर्ज के दबाव से परेशान होकर यह कदम उठाना पड़ा।
दरअसल, जिले के गांव-गांव में फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी सक्रिय हैं। इनमें महिला कर्मचारी भी शामिल होती हैं, जो महिलाओं का बैंक में खाता खुलवाती हैं। पुलिस ने बताया कि विकास और उसकी पत्नी रजनी ने भी फाइनेंस कंपनियों से पांच लाख रुपये लोन ले रखा था। इसके अलावा विकास ने बाइक भी फाइनेंस पर लिया हुआ है। फाइनेंस कंपनी वाले रोज घर आकर किस्त जमा कराने के लिए कहने लगे। इसके बाद विकास ने उनसे कुछ दिन का समय मांगा, लेकिन दबाव बढ़ता चला गया।
विकास की आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी। इसलिए किस्त के रुपये इकट्ठा नहीं कर पाया। बताया जाता है कि जब किस्त नहीं आती है तो यह लोग घर का सामान तक उठा ले जाते हैं। कुल मिलाकर इसे साहूकारी प्रथा का नया स्वरूप कह सकते हैं, जिसके लिए कोई लाइसेंस भी नहीं होता। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इस दलदल में फंस जाते हैं।
चार भाइयों में दूसरे नंबर का है विकास : नंदी फिरोजपुर निवासी विकास चार भाई है। इनमें विकास बड़े से दूसरे नंबर का है। बड़ा भाई चीकू, छोटा भाई कमल और शक्ति है। चीकू और शक्ति बाहर नौकरी करते हैं। शक्ति हरिद्वार की एक कंपनी में नौकरी करता है, जबकि विकास मोची का काम करता है, जो गांव के अलावा अन्य गांवों में फेरी लगाता था। विकास की दो बेटी और एक बेटा है। विकास के पिता की गांव में परचून की दुकान है। तीन बहनों की शादी हो चुकी है।