- कई किसान पूरे वर्ष कर रहे मशरूम की खेती
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। परंपरागत खेती में बढ़ती लागत और कम होते मुनाफे के चलते जनपद के किसान कृषि विविधीकरण को अपना रहे हैं। कम लागत में बढि़या लाभ को देखते हुए जिले के काफी किसान ढिंगरी (ऑयस्टर) मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। कम समय की इस खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
जनपद के किसान खेती में नए प्रयोग कर रहे हैंं। इनमें ढिंगरी मशरूम की खेती भी शामिल है। इसके उत्पादन के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 प्रतिशत नमी होनी चाहिए। इसकी खेती के लिए फसल अवशेष, गेहूं का भूसा, पुआल और गन्ने की सूखी पत्तियां का प्रयोग किया जाता है। इसके उत्पादन के लिए बैग बनाने से पहले भूसे को 12 घंटे पानी में भिगोकर रखा जाता है। इसे बैग में भरने के बाद जब इसका पानी पूरी तरह से निकल लाता है, तब इसमें बीज (ढिंगरी स्पान) को मिला दिया जाता है। बैग में 10 से 15 छेद बना दिए जाते हैं। इन छेदों से मशरूम बाहर निकलती है। इसके 15 से 20 दिनाें के बाद ढिंगरी मशरूम तोड़ने लायक हो जाती है। उत्पादक ढिंगरी मशरूम को देहरादून, चंडीगढ़, दिल्ली जैसे महानगरों में इसकी बिक्री कर रहे हैं। इस समय मशरूम की इस प्रजाति का औसत भाव 90 से 120 रुपये तक चल रहा है। कम समय की यह फसल किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है।
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वर्जन
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ढिंगरी मशरूम की खेती जिस भूसे में होती है वह काफी पौष्टिक हो जाता है। उत्पादन लेने के बाद किसान इस भूसे को अपने पशुओं को खिलाते हैं। जिससे उनका स्वास्थ्य अच्छा रहने के साथ ही दूध भी बढ़ता है। जिले में करीब 122 किसान ढिंगरी मशरूम की खेती कर बढि़या आय प्राप्त कर रहे हैं। - डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी एवं मशरूम विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र।
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बोले उत्पादक -
ढिंगरी मशरूम को अप्रैल के अंतिम सप्ताह में लगाया गया था। अब इसका उत्पादन भी शुरू हो गया है। इसकी आपूर्ति देहरादून मंडी में की गई। फिलहाल इसका भाव 100 से 120 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। संदीप सैनी, ग्राम आजमपुर।
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मशरूम की खेती पूरी तरह से नगदी फसल है। हम पूरे वर्ष मशरूम की खेती करते हैं। बटन मशरूम के अलावा ढिंगरी मशरूम की खेती भी बढि़या आमदनी दे रही है। इसको विकास नगर और देहरादून मंडी में बेचा जा रहा है। इस समय इसका औसत भाव 90 से 100 रुपये प्रति किलो चल रहा है। - किरण, ग्राम फतेहपुर कलां।