सहारनपुर में बिगड़े हालात को भांपने में प्रशासन से फिर चूक हुई है। प्रशासन ने पहले तो बसपा सुप्रीमो मायावती के मंगलवार के शब्बीरपुर दौरे को हल्के में लिया, जिसका नतीजा यह रहा कि उनके पहुंचने से दस मिनट पहले ही गांव का माहौल फिर से बिगड़ गया।
पर्याप्त पुलिस बल तैनात न होने की वजह से अव्यवस्था रही। इसके बाद शब्बीरपुर से लौट रहे लोगों पर घात लगाकर तमंचों और तलवारों से हमला कर दिया गया, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि आधा दर्जन अस्पताल में भर्ती हैं।
सबसे पहले 20 अप्रैल को सड़क दूधली में डॉ. अंबेडकर की शोभायात्रा के दौरान सांप्रदायिक बवाल हुआ था। उसके बाद एसएसपी कार्यालय तक पर तोड़फोड़ की गई थी। उक्त घटना में प्रशासन की घोर लापरवाही सामने आई थी।
दूसरी चूक प्रशासन से शब्बीरपुर में हुई। यहां महाराणा प्रताप की जयंती के उपलक्ष्य में निकाली जा रही शोभायात्रा को लेकर दलित और राजपूतों में संघर्ष हो गया था। इसमें एक युवक की जान चली गई थी, जबकि दो दर्जन से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया था।
करीब दो दर्जन लोग घायल हुए थे। इसके बाद नौ मई को जिले भर में हुए उपद्रव में भी प्रशासन और खुफिया विभाग फेल नजर आया था। शब्बीरपुर के पीड़ितों का दर्द बांटने बसपा सुप्रीमो मायावती मंगलवार को गांव पहुंची।
मायावती के पहुंचने को लेकर भी प्रशासन ने खूब लापरवाही बरती। नतीजा गांव में पर्याप्त पुलिस बल न होने की वजह से मायावती के पहुंचने से दस मिनट पहले ही फिर माहौल खराब हो गया।
राजपूतों ने दलित पक्ष के लोगों पर उनके मोहल्ले में आगजनी करने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। डीएम एनपी सिंह और एसएसपी एससी दुबे ने फोर्स के साथ पहुंचकर स्थिति को संभाला।
मगर इसके बावजूद अव्यवस्था नजर आई। भीड़ को काबू करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल नहीं था। ऐसे में मायावती सभी पीड़ितों से नहीं मिल सकीं। मायावती के शब्बीरपुर पहुंचने को लेकर प्रशासन के हाथ पैर फूले हुए थे।
उनके पहुंचने से पहले ही गांव का माहौल खराब हो गया था। ऐसे में प्रशासन को अनहोनी का खतरा बना हुआ था। खुफिया विभाग ने माहौल खराब होने का हवाला देते हुए मायावती को पीड़ितों के घर न जाने देने की बात अफसरों से कही थी। इसके बावजूद मायावती पीड़ित के घर पहुंची। मायावती के गांव में रहने तक प्रशासन में हड़कंप की स्थिति रही। मायावती के क्षेत्र से सकुशल निकलने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।