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नुकसान पहुंचा रहा सैनिटाइजर का अधिक इस्तेमाल

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सहारनपुर। कोविड-19 महामारी से बचाव की दिशा में स्वच्छता की एक अहम भूमिका है। बीमारी से बचने के लिए हाथों को साफ रखने पर जोर दिया गया है। इसके चलते हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल अत्यधिक मात्रा में बढ़ा है, जो कई लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है।
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एसबीडी जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्मवीर सिंह का कहना है कि लोगों ने हैंड सैनिटाइजर को ही हाथ धुलाई का बेहतर माध्यम मान लिया है। मगर हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए, जब साबुन व पानी उपलब्ध नहीं हो। उन्होंने बताया कि बीते दो माह में 50 से अधिक ऐसे मरीज आए हैं, जिनके हाथों में जलन और खुजली की शिकायत थी। उनसे पूछताछ में पता चला है कि उक्त मरीज हैंड सैनिटाइजर का अधिक इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में उन्हें हैंड सैनिटाइजर की जगह किसी अच्छे हैंडवॉश या फिर साबुन का इस्तेमाल हाथ धुलने में करने की सलाह दी गई।
हैंड सैनिटाइजर के नुकसान
हैंड सैनिटाइजर में ट्राइक्लोसान नाम एक केमिकल होता है, जिसे हाथ की स्किन सोख लेती है। इसके ज्यादा इस्तेमाल से यह केमिकल आपकी त्वचा से होते हुए आपके रक्त में मिल जाता हैं। रक्त में मिलने के बाद यह आपकी मांसपेशियों के ऑर्डिनेशन को नुकसान पहुंचाता है।
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हैंड सैनिटाइजर में विषैले तत्व और बेंजाल्कोनियम क्लोराइड होता है, जो कीटाणुओं और बैक्टीरिया को हाथों से बाहर निकाल देता है। मगर यह हमारी त्वचा के लिए अच्छा नहीं होता है। इससे त्वचा में जलन और खुजली जैसी समस्याएं हो सकती है।
सैनिटाइजर में खुशबू के लिए फैथलेट्स नामक रसायन का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मात्रा जिन सैनिटाइजर में ज्यादा होती है। वह मनुष्य के लिए हानिकारक होते हैं। इस तरह के अत्यधिक खुशबू वाले सैनिटाइजर लीवर, किडनी, फेफड़े तथा प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं।
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सैनिटाइजर में अल्कोहल की मात्रा होने की वजह से ये बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। खासकर यदि बच्चे इसे नादानी में निगल लें।
सैनिटाइजर के ज्यादा इस्तेमाल से त्वचा खुश्क हो जाती है।
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