सहारनपुर के रामपुर मनिहारान का गुमनाम गांव सकतपुर अब देश भर में सुर्खियों में आ गया है। आगरा पुरातत्व विभाग की टीम ने इस गांव में 141 दिनों तक उत्खनन का काम किया।
उत्खनन के दौरान मिले अवशेषों के शोध से पता चला है कि सभी अवशेष चार हजार वर्ष पुराने हैं। आगरा उप मंडल पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्वविद डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में 24 फरवरी से गांव सकतपुर में उत्खनन का कार्य आरंभ किया गया था।
141 दिनों तक चले उत्खनन में 14 जुलाई को अंतिम दिन तीन सिल बट्टे, पक्षी को गुलेल के मारने व उसे उड़ाने के लिए हाथ से बनाई गई शंवाग बाल मिली है।
इससे पूर्व अब तक विशालकाय जानवर का जबड़ा, मिट्टी के बर्तन पकाने एवं धातु पिघलाने की पांच भट्टियां, धातु की चूड़ियां, खिलौना गाड़ी के पहिए, पशु आकृति, मुष्टिका, सुराही, तांब्र पत्र, तांबे की कुल्हाड़ी, मृदभांड, कोयला, दाल के बीज आदि प्राप्त हुए हैं।
पुरातत्व विभाग के अधीक्षण पुरातत्व विद डा. भुवन विक्रम ने शुक्रवार को उत्खनन कार्य की समाप्ति की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी टीम ने इस गांव में कुल 141 दिनों तक उत्खनन का कार्य किया है। इस दौरान मिले अवशेषों पर अब और शोध कर उसे प्रकाशित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गांव सकतपुर में अब तक के शोध से सही पता चला है कि इस गांव में प्राचीन सभ्यता का इतिहास दफन है। उनके विभाग द्वारा अब तक किए गए उत्खनन में अब गांव सकतपुर का नाम भी जुड़ गया है।
उन्होंने कहा उत्खनन के दौरान इस गांव के लोगों का भी टीम के साथ बड़ा अच्छा व्यवहार रहा है। टीम ने आज कार्य समाप्ति के दौरान उनका भी धन्यवाद किया।
डा. भुवन विक्रम ने बताया कि उनकी टीम ने आसपास के गांव सढौली हरिया, बागा खेड़ी का भी दौरा किया है।
इन गांवों में भी प्राचीन सभ्यता का राज छिपा है।
उनका विभाग इसके लिए भी खाका तैयार कर रहा है। जिस पर जलद ही कार्य किया जाएगा। उन्होंने उत्खनन की खबरों को लगातार और प्रमुखता से प्रकाशित करने पर अमर उजाला का आभार जताया। टीम शुक्रवार को अपना कार्य समाप्त कर आगरा लौट गई है।