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बुराइयों से न रुकने वाले का रोजा, रोजा नहीं फाका होगा

Tue, 07 Jun 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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रमजान - फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर के देवबंद में रहमतों और बरकतों वाला मुकद्दस रमजान का महीना संभवत: आज से शुरू होगा। रोजा क्या है, रोजेदार को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और इसकी कितनी अहमियत है।
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इन तमाम बातों पर रोशनी डालते हुए दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रमजान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास होता है। 

रमजान माह की फजीलतों पर विस्तार से रोशनी डालते हुए मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि रमजान मुबारक महीना है और अल्लाह ने रमजान के रोजे फर्ज किए हैं। जिनका बहुत सवाब है।
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नमाज, हज, जकात के साथ रोजा भी अहम फर्ज है, जिसे हर सेहदमंद, अक्लमंद और बालिग मुसलमान के लिए रखना लाजिमी है। इस माह की बहुत बरकतें हैं, जो अल्लाह अपने बंदों को अता  करता है।

उन्होंने कहा कि रोजा नाम है सुबह से शाम तक खाने पीने से परहेज करने, भूख प्यास बर्दाश्त करने, झूठ न बोलने,   धोखा न देने, गाली न देने, गुस्सा और बेईमानी न करने का। 

 जो आदमी सुबह से शाम तक भूखा रहे, लेकिन झूठ बोलना न छोड़े, बुरे काम करता रहे और पांचों वक्त की नमाज और तरावीह पाबंदी से न पढ़े तो उसका रोजा-रोजा नहीं बल्कि यह फाका होगा, जो अल्लाह को पसंद नहीं है।

मौलाना नसीम ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी ऐसी मजबूरी की वजह से रोजा नहीं रख पा रहा है जिसकी इजाजत शरीयत में दी हुई है तो ऐसे आदमी को चाहिए कि वह खुलेआम खाना पीना न करे, रोजेदारों का अहतराम (इज्जत) करे।

जो आदमी जानबूझकर रोजा नहीं रखता वो बड़ा गुनाहगार है। उसको या तो लगातार 60 रोजे रखने होंगे या फिर 60 आदमियों को खाना खिलाना होगा। साथ ही कहा कि यदि कोई मजबूरी में रोजा छोड़ता है तो रमजान के बाद उसे छोड़े हुए रोजे रखने होंगे।
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