सहारनपुर। नगर निगम नागरिकों से जल मूल्य वसूलने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नियमावली तैयार की जा रही है। जल मूल्य न्यूनतम 1500 रुपये से अधिकतम 4,500 रुपये सालाना वसूला जाएगा। जल मूल्य भवनों के असेसमेंट के आधार पर निर्धारित किया जाएगा। इससे महानगर के करीब 1.65 लाख भवन और उनमें रहने वाले करीब आठ लाख नागरिक प्रभावित होंगे।
महानगर में 1.42 भवन पंजीकृत हैं, जिनमें व्यावसायिक और आवासीय दोनों शामिल हैं, जबकि असर में इनकी संख्या 1.65 लाख से अधिक है। ऐसे में नगर निगम सभी भवनों का असेसमेंट करा रहा है, जिससे की छूटे हुए भवनों पर भी टैक्स लगाया जा सके। अभी तक नगर निगम भवन स्वामियों ने जल कर वसूलता है, लेकिन जल्द ही नागरिक जल मूल्य चुकाएंगे। इसका प्रस्ताव जल कल विभाग के पूर्व महाप्रबंधक द्वारा तैयार किया गया था, जिस पर नगर निगम अब काम कर रहा है।
जल मूल्य भवनों के क्षेत्रफल के हिसाब से निर्धारित है। इसमें शून्य से 360 वर्ग गज, 361 से 2000 वर्ग गज, 2001 से 3500 वर्ग गज, 3501 से 5000 वर्ग गज और 5001 से अधिक कैटेगरी बनाई गई है। जल मूल्य प्रत्येक कैटेगरी पर अलग अलग निर्धारित है। सबसे कम क्षेत्रफल वाले भवनों से न्यूनतम 1500 रुपये और 5001 या उससे अधिक वर्ग गज वाले भवनों से अधिकतम 4500 हजार रुपये वसूलने का नियम है।
पानी की बर्बादी रोकने को लग सकते हैं मीटर
महानगर में 120 से अधिक छोटे और बड़े नलकूप हैं, जिनसे सभी 70 वार्डों में पेयजल आपूर्ति होती है। जल कल विभाग के आंकड़ों के अनुसार महानगर में एक व्यक्ति प्रतिदिन 35 लीटर पानी खर्च करता है, जो मानक से अधिक है। इससे जाहिर होता है कि पानी की बर्बादी अधिक है। पानी की बर्बादी रोकने के लिए मीटर भी लगाए जा सकते हैं।
महानगर में जल मूल्य वसूलने के लिए पूर्व महाप्रबंधक द्वारा प्रस्ताव तैयार किया गया है। भवनों के क्षेत्रफल के हिसाब से जल मूल्य निर्धारित है। जल मूल्य असेसमेंट के आधार पर लगेगा। खास बात यह है कि असेसमेंट में जल कर और जल मूल्य में से जो अधिक होगा वह वसूला जाएगा। दोनों एक साथ नहीं लिए जा सकते। - विजय बहादुर सिंह, अधिशासी अभियंता, जल कल