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नालियों में बह रहा गोबर और खून

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कमेला क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय के गेट पर पड़ा गोबर और कचरा। - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। नाले में गोबर और खून के साथ बहते मांस के टुकड़े। दुर्गंध ऐसी कि किसी भी व्यक्ति का सांस लेना मुश्किल हो जाए। ऐसा ही कुछ हाल है शहर के बीचो बीच स्थित कमेला क्षेत्र का। अमर उजाला की टीम सोमवार को कमेला क्षेत्र में जल और वायु प्रदूषण की स्थिति जानने पहुंची। स्थिति काफी हैरान करने वाली थी। ऐसे में नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंशा पर सवाल उठना लाजिमी है।
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अमर उजाला की टीम सोमवार की दोपहर करीब 12 बजे कमेला क्षेत्र पहुंची। कमेला क्षेत्र से एक छोटा नाला पश्चिम दिशा से पूरब की ओर बहता है, जिसमें भारी मात्रा में गोबर और खून बहता नजर आया। कुछ जगहों पर मांस के टुकड़े तैरकर बहते दिखे। जिन पर कुत्ते झपट रहे थे। इससे आगे चलने पर कमेला से कोलागढ़ की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह गोबर और कचरे से अटा मिला। जिस पर बिना बरसात के भी कीचड़ भरा हुआ था। इसी मार्ग पर आगे चलकर भारी मात्रा में गोबर खुले में डाला गया है। स्थानीय लोगों ने बताया कि उक्त गोबर कमेला क्षेत्र से ट्रॉलियों में भरकर लाया जाता है, जिसे खुले में डाला जा रहा है। सवाल यह है कि जब कमेला से निकलने वाले गंदे पानी और गोबर के ट्रीटमेंट की व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं तो नालों में बहने वाला गोबर और खून कहां से आ रहा है। इस पर कहा जा रहा है कि क्षेत्र में कई मिनी कमेले चल रहे हैं।
स्कूल के बाहर जमा है कचरा
कमेले के पास ही परिषदीय प्राथमिक विद्यालय है, जिसके गेट के ठीक सामने कचरे का भारी ढेर लगा है। यहां 12 बजे तक निगम के रेहड़ों से लाकर कचरा डाला जा रहा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे का उठान प्रतिदिन नहीं होता है और ना ही कचरा उठान की कोई समय है। ऐसे में विद्यालय के बाहर कचरा स्थाई रूप से बना रहता है। इसी के पास राजकीय हाई स्कूल भी है।
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मुख्य सड़क पर कीचड़
कमेला क्षेत्र के बीच हो होकर गुजरने वाली मुख्य सड़क वर्षों से टूटी हुई है। इस सड़क पर दुपहिया वाहन चालकों का निकलना तो दूर पैदल चलना भी जोखिमभरा है। करीब 200 मीटर सड़क पर कीचड़ की स्थिति है।
स्मार्ट सिटी के बीच में कमेला
डेयरियों से शहर में गंदगी फैल रही है। ऐसे में नगर निगम ने डेयरियों को शहर से बाहर करने का अभियान छेड़ा हुआ है। शहर के बीच में चलता है कमेला, जिसकी वजह से क्षेत्र में भारी गंदगी है। चूंकि कमेला सरकारी है। ऐसे में नगर निगम कमेले से प्रत्येक पशु के हिसाब से रॉयल्टी वसूलता है। खास बात यह है कि कमेला स्मार्ट सिटी योजना के तहत चिह्नित किए गए एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में डेयरियों के साथ-साथ क्या कमेला स्मार्ट सिटी से बाहर होगा?
सरकारी कमेले में ट्रीटमेंट प्लांट लगा हुआ है, जिसकी हम समय-समय पर जांच करते हैं। यदि कोई नालों में गोबर और खून या मांस के टुकड़े बहा रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी इसके लिए जिम्मेदार होंगे उन पर सख्त कार्रवाई होगी।
एसआर मौर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
कमेले में ट्रीटमेंट प्लांट लगा है। रही बात कमेले को शहर से बाहर करने की तो यह शासन के हाथ में है। यदि शासन कमेले को बाहर करने के आदेश देगा तो निश्चित रूप से उसे बाहर किया जाएगा।
ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।

नाले में बहता गोबर और खून।- फोटो : SAHARANPUR

कोलागढ़ मार्ग पर खाली प्लॉट में भारी मात्रा में डाला गया गोबर।- फोटो : SAHARANPUR

कमेला क्षेत्र में नाले में पड़ा मांस का लोथड़ा।- फोटो : SAHARANPUR

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