सड़क बनाने में विभाग द्वारा बरती गई लापरवाही।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खराब इंजीनियरिंग की वजह से शहर की ज्यादातर सड़कें डेथ कारपेट, चौराहे और तिराहे डेथ प्वाइंट बन गए हैं। करीब दो महीने में 25 से अधिक लोग अपनी जान गवा चुके हैं। बावजूद इसके सड़कों के निर्माण में लापरवाही बरता जाना जारी है।
पिछले दिनों जिला अस्पताल के पास चौधरी चरण सिंह चौक पर कैंटर ने दो राहगीरों को कुचल दिया था। हादसे में दोनों की मौत हो गई थी। इस प्वाइंट पर अक्सर हादसे होने की एक मुख्य वजह पुल से उतरकर सीधे अंबेडकर चौक की ओर जाने वाली सड़क की चौड़ाई एकदम से कम हो जाना है। इसके अलावा सड़क के जिस साइड में मेडिकल स्टोर्स बने हैं।
उस साइड में एक बड़ा गड्ढा भी बना हुआ है, जो हादसों की वजह बनता है। यही हालत नवाब गंज चौक की है, जहां करीब पांच महीने पहले एक ट्रक ने दस साल के बच्चे को कुचल दिया था। इस चौराहे पर एक साइड में पुलिस चौकी की वजह से अतिक्रमण है और दूसरी साइड बिजली के पोल सड़क पर गाड़े गए हैं। ऐसे में इस चौराहे पर भारी वाहनों को घूमने में परेशानी रहती है।
शहर में सबसे खतरनाक तिराहा विश्वकर्मा चौक का है, जहां जिला अस्पताल के पुल से उतरने के बाद बड़े वाहनों के लिए पेपर मिल रोड की ओर घूम पाना मुश्किल रहता है। ऐसे में अक्सर यहां हादसे होते हैं। इस तिराहे पर स्थाई अतिक्रमण है, जिसे हटा पाना प्रशासन के लिए आसान नहीं है। सड़कों में आईटीसी रोड सबसे खतरनाक मार्ग है, जिसे डेथ कारपेट कहा जाता है।
इस मार्ग पर दिन-रात ट्रैक्टर ट्रॉलियों की आवाजाही तथा तेज गति हादसों की वजह बनती है। खराब इंजीनियरिंग इसलिए कही जाएगी, क्योंकि सड़कें बनाते समय सड़क और सड़क से बाहर बचे बाकी के हिस्से में ऊंच-नीच बन जाती है, जिस पर बाइक फिसलने का खतरा रहता है। बिजली के खंभे भी सड़कों के बीच में खड़े होने की वजह से वाहनों को निकलने में परेशानी रहती है, जो हादसों की वजह बनती है।