दिनभर रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी की वजह से ठंडक बढ़ गई। ठंड से बचने के लिए लोग खासकर छोटे बच्चे गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए। बूंदाबांदी की वजह से जन जीवन भी प्रभावित हुआ। ठंड बढ़ने के साथ ही मरीजों की मुश्किल भी बढ़ गई है।
दिसंबर शुरू होने के बाद भी नौ दिसंबर तक कोई खास ठंडक नहीं थी। लोग हाफ स्वेटर पहनकर निकल रहे थे। कई दिन से आसमान में बादल जरूर थे। ऐसे में बारिश होने की उम्मीद लगाई जा रही थी। शुक्रवार की तड़के बिस्तर से उठे लोगों का स्वागत बूंदाबांदी से हुआ।
दिनभर सूरज न निकलने, ठंडी हवा चलने और बूंदाबांदी की वजह से मौसम में बढ़ी हुई ठंड दर्ज की गई। ऐसे में हाफ स्वेटर पहनने वाले लोग भी शुक्रवार को फुल बाजू के स्वेटर और जैकेट पहने नजर आए। स्कूल जाने वाले बच्चे भी गर्म कपड़ों में लिपटे नजर आए।
कई बार बूंदाबांदी थोड़ी तेज हुई, जिसका असर लोगों के कामकाज पर भी पड़ा। अनेक लोग बाजार में छतरियां लेकर निकले थे। उधर, मौसम में बढ़ी ठंडक को मरीजों के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है। शहर के सीनियर फिजीशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने मरीजों खासकर दिल के मरीजों को सर्दी से बचकर रहने की सलाह दी है।
उनका कहना है कि दिल के मरीजों को सर्दियों में मॉर्निंग वॉक से बचना चाहिए, क्योंकि कोहरा और अधिक ठंड उन्हें नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा उन्होंने सामान्य लोगों को भी सर्दी से बचने शरीर को गर्म कपड़ों से ढककर निकलने की सलाह दी है।