मैंगलोर विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएंगी डॉ. वीरेंद्र आजम की लघुकथाएं
सहारनपुर। साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आजम की लघुकथाएं कर्नाटक के मैंगलोर विश्वविद्यालय में पढ़ाई जाएंगी। विश्वविद्यालय ने बीसीए के पाठ्यक्रम में लघुकथा संचयन ‘लघुकथा कौस्तुभ’ नामक पुस्तक को शामिल किया।
राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक का संपादन वरिष्ठ कथाकार बलराम ने किया। देश की सर्वोच्च साहित्यक संस्था साहित्य अकादमी के संपादक एवं वरिष्ठ कथाकार बलराम ने डॉ. वीरेंद्र आजम को पत्र लिखकर यह जानकारी दी। ‘लघुकथा कौस्तुभ’ में डॉ. वीरेंद्र आजम की लघुकथाएं देश के प्रख्यात साहित्यकारों भारतेंदु हरिश्चंद्र, जयशंकर प्रसाद, माखन लाल चतुर्वेदी, कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर, पदुमलाल पन्नालाल बख्शी, माधवराव सप्रे, राजेंद्र यादव, रामवृक्ष बेनीपुरी व बलराम आदि वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ पढ़ाई जाएंगी। पुस्तक में देश के 20 साहित्यकारों की 96 लघुकथाएं शामिल हैं। ‘लघुकथा कौस्तुभ’ संचयन में डॉ. वीरेंद्र आजम की तीन लघुकथाएं ममता, धैर्य और संतोष तथा फूल को शामिल किया है। कथाकार बलराम के मुताबिक इसके अलावा डॉ. वीरेंद्र आजम की पांच लघुकथाएं भारत कथा कोष में भी शामिल की हैं। कोष में 25 भाषाओं की लघुकथाएं शामिल रहेंगी। वीरेंद्र आजम की लघुकथाएं कोष के उत्तर प्रदेश खंड में रखी हैं। डॉ. वीरेंद्र आजम सहारनपुर से प्रकाशित हिंदी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका के संपादक हैं और व्यंग्य, समीक्षा, कविता, कहानी, बाल गीत आदि लिखते हैं।