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रॉ मैटीरियल महंगा, घटेगी बटन मशरूम की खेती

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मशरूम की खेती - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कच्चा माल महंगा होने और बाजार में बटन मशरूम के दाम कम होने का असर इसकी खेती पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जिले में 15 प्रतिशत तक बटन मशरूम प्रजाति का उत्पादन गिर सकता है।
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जिले का मौसम वर्ष भर मशरूम की खेती के लिए अनुकूल है। जिले में हर साल करीब 300 टन मशरूम का उत्पादन होता है। यहां पर बटन, ढिगरी और मिल्की मशरूम की खेती प्रमुखता से होती है। सफेद बटन मशरूम की खेती के लिए बनाए जाने वाले कंपोस्ट में गेहूं का भूसा, चोकर, जिप्सम, यूरिया, पोटाश, फास्फोरस और कैल्शियम का इस्तेमाल होता है। इस बार गेहूं के भूसे से लेकर अन्य आवश्यक सामग्री के दामों में गत वर्ष की अपेक्षा 15 से 20 फीसदी का इजाफा है।
प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र एवं मशरूम विशेषज्ञ डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि इस समय बटन मशरूम की खेती का समय चल रहा है। कच्चा माल महंगा होने का असर मशरूम की खेती पर पडे़गा। प्रतिस्पर्धा के चलते बाजार में भी इसका भाव गत वर्ष की अपेक्षा 10 से 15 रुपये प्रति किलो कम चल रहा है। इस बार बटन मशरूम की खेती में 15 फीसदी तक कमी आने की संभावना है।
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मशरूम में होते हैं भरपूर पोषक तत्व
डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि मशरूम में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। इसमें ढाई से तीन प्रतिशत तक प्रोटीन, चार से छह प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट, 0.4 से 06 फीसदी वसा, रेशा एक प्रतिशत होता है। इसके अलावा विटामिन बी, डी, फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में होने से इसका सेवन खून की कमी को दूर करने में सहायक है और पोटेशियम की अधिकता के चलते उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मददगार साबित होता है।
अक्तूबर से मार्च तक बटन मशरूम की खेती
मिल्की मशरूम की खेती का समय जून से सितंबर माह है। बटन मशरूम के लिए अक्तूबर से मार्च और ढिंगरी या ऑस्टर मशरूम की खेती फरवरी से मई तक होती है। सौ क्विंटल कंपोस्ट में सफेद बटन मशरूम की औसत उपज 35 क्विंटल, ढिंगरी मशरूम का औसत उत्पादन 60 क्विंटल तक और मिल्की मशरूम का औसत उत्पादन 45 से 50 क्विंटल तक है।
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