सहारनपुर में कथा व्यास आस्था भारती ने सुदामा एवं भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का भावपूर्ण वर्णन किया। साउथ सिटी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन आस्था भारती ने कहा कि श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग मित्रवत भावनाओं की सुंदर अभिव्यक्ति है।
यह दर्शाता है कि किस तरह दीनानाथ प्रभु अपने दीनहीन सखा को सर्वोच्च सिंहासन पर बिठा देते है और उसके भाव स्वरुप मुट्ठी भर चावलों के बदले क्षण मात्र में उसे सर्वस्त्र दान कर देते है। तदोपरांत साध्वी ने दान की महिमा का बखान किया।
विदुषी ने श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन के मार्मिक प्रसंग को सुनाया। विदुषी ने कहा कि राजा परीक्षित भय और असुरक्षा से ग्रस्त थे। राजा परीक्षित को यह श्राप मिला था कि सात दिवसों के पश्चात उनकी मृत्यु हो जाएगी।
लेकिन परीक्षित ने इस लघु अवधि का इतना अपूर्व रुप से सदुपयोग किया कि उनके लिए मोक्ष के द्वार खुल गए। लेकिन ध्वात्व्य है कि परीक्षित की मुक्ति केवल हरि चर्चा या कृष्ण लीलाओं को श्रवण करने मात्र से नहीं हुई थी।
अपितु पूर्ण गुरु श्री शुक्रदेव महाराज द्वारा प्रभु के तत्व रुप को अपने अंदर जान लेने पर हुई थी। नकुड़ विधायक धर्मसिंह सैनी, एसपी सिटी महेंद्र यादव, पूर्व विधायक लाजकृष्ण गांधी, शशि वालिया, गुलशन सेठी, संजीव, सतीश, सुरेश, हरीश मौजूद रहे।