सहारनपुर। मिर्गी एक मस्तिष्क तंत्रकीय विकार है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते हैं। ऊपरी हवा और झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर इलाज कराने की जरूरत है। रोगी का समय रहते उपचार कराया जाए तो इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
एसबीडी जिला अस्पताल में मानसिक रोग ओपीडी सप्ताह में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलती है। इसमें हर दिन 30 से 40 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से चार से पांच ऐसे मरीज होते हैं, जो मिर्गी से पीड़ित रहते हैं। इन मरीजों को झाड़ फूंक से बचने के साथ इलाज कराने की सलाह दी जाती है, साथ ही बताया जा रहा है कि यह बीमारी लाइलाज नहीं है। समय पर इलाज मिलने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।
केस नंबर-01
गंगोह निवासी महिला को मिर्गी के दौरे पड़ते थे। परिजन ऊपरी हवा का प्रभाव समझकर झाड़ फूंक कराते रहे। बाद में किसी की सलाह पर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां दिखाया तो पता चला मिर्गी रोग है। वह उपचार के बाद अब स्वस्थ है।
केस नंबर-02
शहर में दिल्ली रोड निवासी युवक को मिर्गी का दौरा पड़ता था। वह जादू टोना समझकर, तंत्र मंत्र कराने लगा परंतु स्वस्थ नहीं हुआ। जिला अस्पताल के मानसिक रोग ओपीडी में चिकित्सकों ने मिर्गी का उपचार शुरू किया। अब काफी बेहतर है।
-सरकारी अस्पतालों में निशुल्क दवा
एसबीडी जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ख्वाजा खयाम ने बताया कि मिर्गी की दवा सरकारी अस्पतालों में निशुल्क मिलती हैं। इसका इलाज निरंतर कराना पड़ता है। यदि व्यक्ति एक समय की भी दवा छोड़ देता है तो दौरा पड़ने का खतरा रहता है।
-मरीज का भावनात्मक सहयोग करें परिजन
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अमरजीत पोपली कहना है कि हरी पत्तीदार सब्जियां खानी चाहिए और फास्ट फूड से दूर रहना चाहिए। इस बीमारी में परिवार को मरीज को भावनात्मक सहयोग देना चाहिए। ऐसी स्थिति में मरीज के प्रति परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
--इन बातों का रखें ध्यान
-मिर्गी के रोगियों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार दवा लेनी चाहिए।
-पर्याप्त व्यायाम, स्वस्थ आहार का ध्यान रख पर्याप्त नींद लेनी चाहिए।
-गंभीर स्थिति या ज्यादा अवधि के दौरे पर ही रोगी को अस्पताल में दिखाना चाहिए।
-परिवार में कोई मिर्गी रोगी है तो उसके दौरे की अवधि देखना जरूरी है।
-मिर्गी आने पर मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें
- गर्दन एक ओर मोड़ दें, ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाएं।