सहारनपुर में प्राइवेट चिकित्सकों की ओपीडी और अन्य सेवाएं बंद रखना मरीजों पर भारी गुजरा। आलम यह रहा कि ठिठुरते हुए इलाज के लिए शहर पहुंचे दूर-दराज के मरीजों और तीमारदारों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
कुछ मरीजों को जिला अस्पताल का सहारा लेना पड़ा, जबकि गंभीर मरीजों को पड़ोसी शहरों में जाना पड़ा। एनएमसी विधेयक के विरोध में सेंट्रल एवं स्टेट आईएमए के आह्वान पर आईएमए सहारनपुर ने दो जनवरी को सभी प्रकार की ओपीडी और डायगनोस्टिक सेवाएं बंद रखने का एलान किया था।
ऐसे में आईएमए से जुड़े सैकड़ों प्राइवेट चिकित्सकों ने मंगलवार को अपनी ओपीडी और अन्य सेवाएं बंद रखीं। उनके क्लीनिक और अस्पताल बंद रहे। इससे मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।
चौधरी चरण सिंह मार्ग पर मौजूद चिकित्सकों के यहां ताले लटके होने से मरीज बाहर बैठे नजर आए। कइयों को मजबूरन सरकारी अस्पताल का रुख करना पड़ा। मंगलवार को हुई आईएमए पदाधिकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष डॉ. मोहन पांडेय ने कहा कि सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की जगह नया नेशनल मेडिकल कमीशन बिल संसद में प्रस्तुत कर रही है।
इस बिल से एक ओर जहां मरीजों और तीमारदारों को नुकसान होगा, वहीं चिकित्सकों के लिए भी इसके साथ काम करना मुश्किल होगा। बैठक में डॉ. राजीव गर्ग, डॉ. संदीप गर्ग, डॉ. पंकज खन्ना, डॉ. उदयराज सिंह, डा. आरके मल्होत्रा, डॉ. अरुण जैन, डॉ. अतुल जैन, डा. अंकुर उपाध्याय, डॉ. सुरेश सिंघल, डॉ. वीके भार्गव, डॉ. प्रवीण शर्मा आदि मौजूद रहे।