सहारनपुर। कई चिकित्सक ऐसे हैं, जिन्होंने कोरोना की दूसरी लहर में अपनी जान की परवाह न करते हुए सेवा और समर्पण भाव से मरीजों का इलाज किया और उनके चेहरों पर मुस्कान लौटाई। यदि ऐसे चिकित्सकों की सूची तैयार की जाए तो लंबी हो जाएगी, लेकिन हमने कुछ ऐसे चिकित्सकों को लिया है, जिन्होंने वाकई में काम किया है और आज लोग उनके काम की सराहना कर रहे हैं। कई चिकित्सक ऐसे रहे, जिनके खुद के परिजन संक्रमित हो गए। ऐसी स्थिति में वह घर पर रहते हुए मोबाइल या फिर ऑनलाइन तरीके से मरीजों से जुड़कर उनको इलाज देते रहे। पेश है रिपोर्ट...
--एसबीडी जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा पर कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी जिम्मेदारी थी। आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना मरीजों के इलाज के साथ ही आईसीयू, इमरजेंसी वार्ड और जनरल वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों का लगातार इलाज करते रहे। कोरोना काल में उन्होंने एक भी छुट्टी नहीं ली।
--एसबीडी जिला अस्पताल के दूसरे फिजीशियन डॉ. सतीश कुमार 15 नंबर ओपीडी में बैठते हैं। कोरोना की दूसरी लहर में पत्नी संक्रमित आने के बाद उन्हें कुछ दिन के लिए घर रहना पड़ा, मगर उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं छोड़ी। बेशक वह कुछ दिन अस्पताल नहीं आए, मगर ऑनलाइन और मोबाइल कॉल के जरिए मरीजों से संपर्क बनाए रखा और परामर्श दिया।
--सीएचसी सरसावा के अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने पहली लहर के साथ ही दूसरी लहर में मरीजों को बेहतर से बेहतर सेवा दिलाने का प्रयास किया। दूसरी लहर में डॉ. राजेश और उनकी पत्नी दोनों संक्रमित हुए अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा। मगर ठीक होने के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट आए।
--राजकीय मेडिकल कॉलेज के महिला वार्ड में तैनात डॉ. स्वाति जैन ने कोरोना की दोनों लहर में खुद को सुरक्षित रखते हुए अनेक गर्भवती महिलाओं का सफल प्रसव कराया। स्वाति ने बताया कि प्रसव कराने के दौरान उनको पीपीई किट पहनकर रहना पड़ता था, जिसमें अधिक देर तक रहना मुश्किल होता था। मगर वह इस बात से खुश हैं कि वह लोगों की मुस्कान की वजह बनी।