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बूंद-बूंद के लिए तरसने लगा जिला

Thu, 12 May 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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गांव भूरीवाला की महिलाएं और बच्चें एक किमी दूर स्थित कुंए से पानी लाने के लिए जाते हुए। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पूरा जिला इस समय डार्क जोन में चला गया है। नहरों में पानी नहीं है। कुएं खत्म हो चुके हैं। तालाबों का अस्तित्व मिटता जा रहा है। हैंडपंपों के भी हलक सूखते जा रहे हैं।

पूरे जिले में लोग पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन अफसर लोगों की प्यास सिर्फ कागजों में ही बुझा पा रहे हैं। हकीकत यह है कि 1600 से अधिक गांवों की प्यास बुझाने के लिए पूरे जिले में सिर्फ 60 गांवों में पेयजल योजनाएं चल रही हैं।
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जिले की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। पीने के पानी के कुएं तो लगभग खत्म ही हो चुके हैं। हैंडपंपों का भी हलक सूख चुका है। जिले में पांच हजार से अधिक हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।

एक हजार से अधिक ऐसे हैंडपंप हैं, जो हिंडन के किनारे हैं। उनका पानी पीने योग्य नहीं रह गया है। इससे गांवों में पीने के पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी सबमर्सिबल को लेकर चिल्ल-पौं कर रहे हैं, लेकिन लोगों के पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।

हकीकत यह है कि जिले में 1600 से अधिक गांव हैं, लेकिन उनमें पीने के पानी का हैंडपंप के अलावा कोई जरिया नहीं है। जल निगम द्वारा पाइपलाइन पेयजल योजना में सिर्फ 32 पुरानी और 28 नई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें से 32 पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी गईं हैं।

इनमें कुछ ऐसी भी हैं, जिनसे दो और तीन गांवों को भी जोड़ा गया है, लेकिन कोई अधिकारियों से पूछे कि जिस ग्राम पंचायत को योजना सौंपी गई है, उसमें क्या सभी घरों में पानी सप्लाई किया जा सका है। पूरे जिले की प्यास सिर्फ 60 पेयजल योजनाओं से ही बुझाई जा रही है। अधिकारी इस बारे में उदासीनता भरा जवाब दे रहे हैं कि बजट नहीं तो फिर योजनाएं कैसे तैयार करें। 

200 हैंडपंपों लगाने के आदेश ः सहारनपुर। विधायकों एवं एमएलसी के कोटे से 100 नए हैंडपंप और 100 हैंडपंप रीबोर कराने का शासनादेश जारी कर दिया गया है। जल निगम के एक्सईएन रविंद्र सिंह ने बताया कि विधायक और एमएलसी के मिलाकर लगभग 200 हैंडपंप तो मिल ही जाएंगे।

कौन मांगेगा शासन से बजट
सहारनपुर। जल निगम और प्रशासनिक अधिकारी पेयजल योजना के लिए बजट न होने की बात तो कह रहे हैं, लेकिन बजट कौन लेकर आएगा, कौन पैरवी करेगा जिले की प्यास बुझाने के लिए, इस पर सभी चुप्पी साधे हुए हैं।
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हैंडपंपों से चल रहा है काम
जल नगम के अधिशासी अभियंता रविंद्र सिंह का कहना है कि 60 पेयजल योजनाएं चल रहीं हैं। 24 तैयार कराई जा रहीं हैं। शेष गांवों में हैंडपंपों से काम चल रहा है। उन्होंने माना कि लगभग साढ़े तीन हजार हैंडपंप खराब हैं, लेकिन साथ ही कहा कि उन्हें भी ठीक करा दिया जाएगा।
 
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