सहारनपुर। जिला महिला अस्पताल से गर्भवतियों को निजी अस्पताल ले जाने के मामले का जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, महिला अस्पताल प्रबंधन ने भी स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई कि किसी भी आशा कार्यकर्ता के कहने पर गंभीर गर्भवती को रेफर न किया जाए।
जिला महिला अस्पताल में कुछ आशा कार्यकर्ताओं के कमीशन का खेल चल रहा है, जो महिला अस्पताल की बदहाली और निजी अस्पताल में सस्ते इलाज कराने का झांसा देती हैं। इसके बाद उन्हें अपने मनचाहे निजी अस्पताल में लेकर जाती हैं, जहां उन्हें सामान्य प्रसव कराने पर दो और ऑपरेशन प्रसव पर ढाई से तीन हजार रुपये का कमीशन मिलता है। महिला अस्पताल में टीम ने स्टिंग किया तो खुलासा हुआ। अमर उजाला में 25 अप्रैल के अंक में जिला महिला अस्पताल में प्रसव पीड़ा पर कमीशनखोरी का खेल, शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद महिला अस्पताल में दिनभर चर्चाएं होती रहीं। वहीं इस मामले को जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने गंभीरता से लिया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को जांच करने के आदेश दिए हैं। निजी अस्पताल में गर्भवतियों को ले जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इसके साथ ही गोपनीय जांच भी कराई जाए, ताकि पता चल सकें कि इसमें कौन-कौन शामिल हैं। जांच के बाद दोषी आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की जाएं। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सीएमएस ने ओपीडी और वार्ड में की चेकिंग
वहीं, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. इंद्रा सिंह ने शनिवार को ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड को चेक किया। वहां पर बाहरी आशा कार्यकर्ताओं को देखा। चिकित्सक, स्टाफ नर्सों को निर्देश दिए कि मरीज के तीमारदार से पूछने के बाद ही रेफर किया जाए। इसमें आशा कार्यकर्ता का कोई रोल नहीं होना चाहिए। अगर स्टाफ को लगता है कि आशा कार्यकर्ता ज्यादा जोर दे रही है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखकर दें।