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चीनी माल से दूरी, होली पर देसी पिचकारी से बरसेगा रंग

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बाजारो में बिकते गुलाल - फोटो : SAHARANPUR
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चीनी माल से दूरी, होली पर देसी पिचकारी से बरसेगा रंग
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सहारनपुर। कोरोना वायरस के कारण चीन से आयातित सामान की सप्लाई बाधित होने के कारण होली पर देसी पिचकारी से देसी रंग बरसेगा। चाइनीज पिचकारी, कलर, गुब्बारों से लेकर अन्य आइटम्स नहीं आ पाए हैं। विक्रेताओं का कहना है कि कोरोना वायरस के डर से अधिकतर लोग पिछले साल के बचे स्टॉक को भी खरीदने से परहेज करेंगे। कोरोना के कारण वुडकार्विंग, मोबाइल, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, गैजेट्स, रेडीमेड गारमेंट्स, कास्मेटिक आइटम्स सहित अन्य कारोबार पर पहले ही बुरा असर पड़ चुका है। इससे जिले में अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है।
दो महीने पहले शुरू हो जाती थी सप्लाई
शहीद गंज में होली के आइटम्स बेचने वाले मनोज कुमार कहते हैं कि आम तौर पर होली से दो महीने पहले से ही चीनी आइटम्स के आर्डर दिए जाते थे और माल की सप्लाई शुरू हो जाती थी। लेकिन इस बार जनवरी और फरवरी माह कोरोना के खौफ में बीत गए। इसका सीधा असर दिल्ली से आर्डर बुकिंग पर पड़ा है। इसलिए देसी आइटम्स की ही बिक्री की जा रही है।
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सोशल मीडिया पर प्रचार का भी असर
दुकानदार संजीव सैनी का कहना है कि सोशल मीडिया पर भी प्रचार किया जा रहा है कि चाइनीज पिचकारी और रंगों से होली न खेलें। इससे वायरस से संक्रमित होने का खतरा रहेगा। ऐसे में लोगों ने भी चाइनीज आइटम्स से दूरी बना ली है।
ये आता है चीन से
विक्रेताओं ने बताया कि चीन से आयातित पिचकारियों में वाटर टैंक, कलर गन, गुलाल गन, गुब्बारे, कलर स्प्रे, गुलाल आदि शामिल हैं। इसके अलावा रंग खेलने से पहले लगाने वाली क्रीम, आर्टिफिशियल बाल, चश्मा आदि भी खूब बिकता है।
देसी आइटम करेंगे जेब ढीली
इस बार होली पर देसी रंग और देसी पिचकारी का प्रयोग बढ़ेगा। देसी आइटम की कीमत अधिक होने के कारण जेब ढीली करनी पड़ेगी। विक्रेताओं ने बताया कि 40 से 50 रुपये में मिलने वाली पिचकारी 80 रुपये में मिलेेेगी। वाटर गन, म्यूजिक गन, वाटर फ्लो, बैंजी डोन शॉवर सहित अन्य आइटम्स 50 से 150 रुपये तक में मिल जाते थे। इनकी कीमतों में भी 100 रुपये तक का इजाफा हो गया है।
पानी भरने वाले गुब्बारे भी महंगे
पिछले दो साल से चाइनीज गुब्बारों की सबसे अधिक मांग रही है। इस बार देशी गुब्बारे बेचे जाएंगे। चाइनीज गुब्बारे वाला पैकेट 30 रुपये में मिलता था। अब देसी गुब्बारों वाला उतनी ही संख्या का पैकेट 55 रुपये तक मिलेगा।
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फूलों की होली खेलें, टेसू के फूलों का गुलाल उड़ाएं
तहसील शिव मंदिर के अधिष्ठाता अभिषेक कृष्णात्रेय और श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ कहते हैं कि होली खेलने का सबसे बेहतर तरीका तो यही है कि फूलों से होली खेलें। इससे न तो किसी वायरस का खतरा रहेगा और न ही त्वचा को नुकसान पहुंचेगा। मंदिरों के अलावा अन्य स्थानों पर फूलों से होली के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यदि फिर भी रंगों का इस्तेमाल करना हो तो टेसू के फूलों से तैयार रंग या देसी और कांच रहित गुलाल का प्रयोग करें।

सहारनपुर में होली के लिये दुकानो पर सजी पिचकारी- फोटो : SAHARANPUR

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