- कोई खतीजा मसूद की 40 हजार से जीत का दावा कर रहा
- तो कोई डॉ. अजय कुमार को 50 हजार वोट से बता रहा जीता हुआ
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। चाय की दुकान से लेकर चौपाल और चौराहों तथा खेत और खलिहान तक में। यहां तक की सरकारी कार्यालयों में भी निकाय चुनाव के परिणाम को लेकर चर्चा जारी है। इन दिनों हर कोई राजनीतिक विश्लेषक की भूमिका में अपने ही आंकड़े पेश कर प्रत्याशियों की जीत का दावा कर रहा है। महापौर सीट पर कोई खतीजा मसूद को 25 से 40 हजार वोट से जीता रहा है, तो कोई डॉ. अजय कुमार के 50 हजार मतों से जीत के दावे कर रहा है। ऐसी स्थिति में 13 मई को मतगणना का नतीजा क्या जाएगा यह देखना सभी के लिए दिलचस्प होगा।
नगर निगम महापौर सीट पर पहले से मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच माना जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह 2017 का निकाय चुनाव है, जिसमें बसपा प्रत्याशी हाजी फजलुर्रहमान को भाजपा प्रत्याशी संजीव वालिया से मात्र दो हजार वोट कम मिले थे। पहले मेयर बने संजीव वालिया को 1,21,201 और हाजी फजलुर्रहमान को 1,19,201 मत मिले थे। बसपा के दूसरे नंबर पर रहने का एक वजह यह भी मानी गई थी, क्योंकि जिन 32 गांवों को शहर में मिलाकर नगर निगम का गठन किया गया था वह दलित बहुल हैं। इसके अलावा उन्हें मुस्लिम होने के नाते मुस्लिम समाज का वोट भी मिला था।
इस बार चुनाव मैदान में इमरान मसूद की भाभी खतीजा मसूद हैं। चूंकि इमरान का अपना वोट बैंक माना जाता है। इसलिए भाजपा के साथ टक्कर खतीजा मसूद की मानी जा रही है। मतदान से पहले के साथ ही मतदान के बाद भी मुकाबला भाजपा और बसपा के ही बीच माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के साथ ही हर गली और मोहल्ले में या कहें प्रत्येक व्यक्ति राजनीतिक विश्लेषक नजर आ रहा है।
मतदान के बाद से पूरे महानगर में भाजपा के डॉ. अजय कुमार और बसपा की खतीजा मसूद की जीत के दावे अलग-अलग लोगों द्वारा किए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि खतीजा मसूद को दलितों का 80 फीसदी से अधिक वोट मिला है। साथ ही मुस्लिमों का ध्रुवीकरण होने पर उनका वोट भी काफी संख्या में उनके खाते में आया है।
उधर, भाजपा के डॉ. अजय कुमार की जीत के सबसे बड़ा दावे की वजह भाजपा की लहर के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इफेक्ट है। साथ ही हिन्दू क्षेत्रों में जमकर वोटिंग हुई है। माना जा रहा है कि उक्त वोटिंग भाजपा और डाॅ. अजय के पक्ष में हुई है। चर्चा यह भी है कि भाजपा ओबीसी के साथ ही दलित और मुस्लिम वोटरों में भी सेंध लगाने में सफल रही है। ऐसे में डॉ. अजय की जीत के प्रबल दावे विश्लेषक कर रहे हैं। हर जगह एक सवाल कॉमन है, जो लोग एक दूसरे से कर रहे हैं वह है ''''किसे जिता रहे हो?'''' यही हाल जनपद के बाकी 11 निकायों का है।