सहारनपुर। जिले में 16154 दिव्यांगजन पंजीकृत हैं, जिनको पेंशन मिल रही है, लेकिन दिव्यांगजनों को व्यापार करने के लिए मिलने वाला अनुदान ऊंट के मुंह में जीरा है। वर्ष में मात्र दस दिव्यांगजनों को ही व्यापार करने को अनुदान दिया जाता है, जबकि 200 से अधिक आवेदन आते हैं।
दरअसल, उन्हीं दिव्यांगजनों को अनुदान दिया जाता है, जिनके पास अपनी दुकान हैं। उनको सब्जी की दुकान, परचून, ठेला, रेहड़ी लगाने को 10 हजार रुपये शासन स्तर से दिए जाते हैं। इसके साथ ही 2500 रुपये की सब्सिडी भी मिलती है, लेकिन हर वर्ष बड़ी संख्या में ऑनलाइन आवेदन आते हैं, लेकिन 10 दिव्यांगजनों का ही चयन होता है। ऐसे में दिव्यांगजन कैसे आत्मनिर्भर बनेंगे। कई बार दिव्यांगजनों का संगठन मांग भी उठा चुका है कि सभी पात्रों को अनुदान दिया जाए, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो पाई है। दिव्यांगजन प्रदर्शन कर प्रशासन के माध्यम से शासन को भी ज्ञापन भेज चुका है, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हुई है।
बढ़ाई जाए राशि, सबको मिले अनुदान
भारतीय दिव्यांग विकास समिति के जिलाध्यक्ष रूपेश गौतम का कहना है कि कई बार अनुदान की राशि बढ़ाने और सभी पात्रों को लाभ दिए जाने की मांग उठाई गई, लेकिन शासन-प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। दस हजार रुपये में व्यक्ति रेहड़ी भी नहीं खरीद पाता है। ऐसे में वह रोजगार कैसे कर पाएगा। सभी दिव्यांगजनों के लिए शासन को योजना संचालित करनी चाहिए।
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यह शासन स्तर का मामला है। विभाग द्वारा पात्र दिव्यांगजनों के ऑनलाइन आवेदन शासन को भेज दिए जाते हैं। विभाग का प्रयास रहता है कि सभी पात्रों को अनुदान मिले। इस बार 18 दिव्यांगजों को अनुदान मिला है।
-दीपिका परिहार, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी