सहारनपुर। अनलॉक एक के दूसरे चरण में होटलों और ढाबों के संचालन की छूट तो मिल गई मगर पहले दिन ही संचालकों में बड़ी मायूूसी देखने को मिली। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक होना और जरूरी इंतजाम करना तो ठीक है मगर कई शर्तें इतनी कठिन और अव्यवहारिक हैं कि उनका अनुपालन आसान नहीं हैं। दूसरी ओर, उनके पास खाने पीने का इंतजाम से लेकर रखरखाव करने वाले अधिकतर कारीगर भी अपने राज्यों को जा चुके हैं। इनमें अधिकतर नेपाल, उत्तराखंड और बिहार राज्यों के हैं।
होटलों और ढाबों के संचालन को छूट के पहले दिन अमर उजाला की टीम ने पड़ताल का प्रयास किया तो अधिकतर संचालकों ने यही बेबसी जाहिर की। कुछ होटल और ढाबों पर सोशल डिस्टेंस, थर्मल स्क्रीनिंग और मास्क के अलावा सैनिटाइजेशन जैसी व्यवस्थाएं भी नजर आईं।
यही हाल रहा तो अस्तित्व बचाना मुश्किल, डीएम से मिलेंगे
- शहर के पंजाब होटल के संचालक चिराग बताते हैं कि ऐसा दौर तो कभी नहीं देखा। जनवरी, फरवरी, अप्रैल और फिर जून का महीना ऐसा होता था जब रोजाना के सामान्य क्लाइंट की बुकिंग के मुकाबले शादियों जैैसे इवेंट से कारोबार कहीं अधिक चमकता था। वह बताते हैं कि उनके जैसे अन्य प्रमुख होटलों में औसत शादी समारोह में ही रोजाना दो से तीन लाख रुपये तक की बुकिंग होती थी। मगर अब शादियों का सीजन ही निकल चुका है। कोरोना संक्रमण के बाद से बाहरी राज्यों या देशों से आने वालों की तो उम्मीद ही कम हो गई है। यही हाल रहा तो अस्तित्व बचाना मुश्किल होगा। रोस्टर के अलावा आगंतुकों के कोविड टेस्ट जैसी शर्तों के कारण ग्राहकों का आना मुश्किल है। आयोजनों में भी 50 से ऊपर लोग नहीं हो सकते। इतने तो वेंडर ही हो जाएंगे। इसलिए इन दिक्कतों को लेकर जल्द ही होटल संचालक डीएम से मिलेंगे।
ज्यादा इनकम रूम स्टे से ही संभव
- अमेरिकन होटल के संचालक विपिन सलूजा कहते हैं कि सामान्य दिनों में रोजाना हजारों लोग बाहरी राज्यों से कामकाज के लिए आते थे। तब कम से कम रूम स्टे पर भी 5000 से 7000 रुपये तक की इनकम हो जाती थी। इसके अलावा खाने पीने का खर्च जोड़कर अलग पैैैसा मिल जाता था। अब शर्तों के साथ संचालन की इजाजत मिली है। मगर कारोबार ठंडा है। जब तक बाहरी राज्यों की सीमाएं नहीं खुलेंगी। आवागमन शुरू नहीं होगा तब तक ऐसा ही रहेगा।
पीक सीजन तो निकल गया, अब रियायत पर टिकी उम्मीद
- दिल्ली रोड स्थित सोलटियर फार्म्स बैंक्वेट हाल संचालक कमल सचदेवा का कहना है कि अप्रैल से जून माह तक शादियों का पीक सीजन निकल गया है। उन्होंने कहा कि यहां सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन भी आसान है, लेकिन कारोबार के लिए रियायतें बढ़ानी पड़ेंगी। तभी आगे कारोबार चल पाएगा। शादियों सहित अन्य खास इवेंट्स के लिए आगंतुकों की संख्या की सीमा बढ़ानी चाहिए। दूसरी समस्या कारीगरों की है। अधिकतर कारीगर बाहर चले गए हैं। कम कर्मचारियों में सीमित काम चलाना पड़ेगा।
शर्तों में ढील मिलेगी तो ही फिर से चल सकेगा कारोबार
- घंटाघर के पास स्थित गुरुनानक ढाबे के संचालक ठाकुर सन्नी बताते हैं कि पहले तो पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, जम्मू, उत्तराखंड से लेकर अन्य राज्यों से आने वाले लोग ढाबों पर रुककर खाना खाते थे। इन ढाबों के भरोसे ही कई राज्यों के सैकड़ों कारीगर भी आश्रित थे। अब ढाबों के संचालन की छूट मिली है। मगर शर्तों में ढील मिलेगी तभी कारोबार चल पाएगा। वे कहते हैं कि सोशल डिस्टेंस से लेकर अन्य सावधानी तो लोगों को अब खुद भी बरतनी होंगी। सरकार भी यही कह रही है कि कोरोना के साथ जीना होगा।
जागरूक भी करेंगे, कारोबार भी बचाएंगे
- अधिकतर होटल और ढाबा संचालकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन से जो नुकसान अब तक झेला है। उसकी चिंता छोड़कर अब आगे तो बढ़ना ही है। इसलिए सबसे पहले तो जो भी लोकल या बाहरी क्लाइंट मिलेंगे, उन्हें कोरोना संक्रमण के प्रति जागरूक करेंगे। स्वास्थ्य के प्रति अधिक सुरक्षा और सतर्कता बरतते हुए खानपान आदि की सुविधाएं दी जाएंगी। कारोबार यदि गति पकड़ता है तो आगे चलकर कुछ स्कीम्स भी लांच करने के प्रयास होंगे। इनमें फैमिली पैक, कपल्स पैक, यूथ स्पेशल, फेस्टिवल पैक जैसी श्रेणियां निर्धारित करने का प्रयास होगा।
हेल्दी फूड पर रहेगा सबसे अधिक जोर
- संचालकों ने बताया कि भविष्य में हैवी डाइट और नॉनवेज कैटेगिरी के मेन्यू पर असर पड़ सकता है। इसकी जगह हर्बल, ट्रेडिशनल और अधिक फ्रूटी लेवल के हेल्दी फूड आइटम्स की अधिक डिमांड रहने की संभावना है। इसलिए इसके अनुरूप ही प्लान बनाया जाएगा। मगर इस तैयारी के लिए भी कम से कम तीन माह का समय लग सकता है।
होटल और ढाबों के साथ कारोबार की स्थिति
- शहर में छोटे और बड़े होटलों की संख्या 48
- मध्यम दर्जें के ढाबों की संख्या 170
- छोटे ढाबों की संख्या 80
- इस व्यवसाय से जुड़े कारोबारी 1500
- इस कारोबार से जुड़े कर्मचारी 5000
- शादियों के सीजन में रोजाना कारोबार 25 से 50 लाख रुपये
- सामान्य दिनों में रोजाना कारोबार 15 से 20 लाख रुपये
- होटलों में कारीगरों की स्थिति 12 फीसदी ही बचे हैं
- किन राज्यों से ज्यादा कारीगर नेपाल, उत्तराखंड, बिहार, यूपी
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होटल में ग्राहको की थर्मेल स्क्रीनिंग करते कर्मी- फोटो : SAHARANPUR
होटल अमेरिकन कीट पहने कर्मी- फोटो : SAHARANPUR
दालमंड़ी स्थित ढाबे पर ग्राहको की थर्मेज स्क्रीनिंग करते ढाबा संचालक- फोटो : SAHARANPUR