सहारनपुर। ’अपने खिलाफ तेरी गवाही के बाद भी, जिंदा हूं देख इतनी तबाही के बाद भी’ शायर महमूद अशहर ने यह कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी। मौका था समाजिक समरसता एवं कौमी एकता के प्रतीक मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में शुक्रवार की रात जनमंच में स्थानीय मुशायरे का।
उद्घाटन महापौर डॉ. अजय कुमार, कार्यक्रम संयोजक फहाद सलीम, मेला चेयरमैन चौधरी वीरसेन सिद्धू, चौधरी अब्दुल वाहिद, सरफराज खान और कार्यक्रम अध्यक्ष योगेश दहिया ने फीता काटकर किया। शमा रोशन डॉ. अजय कुमार, संयोजक फहाद सलीम, सैयद शकील, उप सभापति मुकेश गक्खड़ व पार्षद संजय गर्ग ने की। मुशायरे की शुरुआत अनवर देवबंदी की नात ए पाक से हुई। दो दर्जन से ज्यादा शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर वाहवाही लूटी। मुशायरे की खास बात यह रही कि स्थानीय मुशायरा होने के बावजूद दूसरे शहरों से भी शायर आमंत्रित किए गए थे।
शायर जावेद आसी ने पढ़ा कि ‘कोई एक कश लगाकर फेंक देता है सिगार अपना, कोई अफसोस करता है जो बीड़ी टूट जाती है।’ मेहनाज स्योहारवी ने ‘मुंह फेरकर वो मेरी तरफ से गुज़र गए, जितने हसीन ख्वाब थे सारे बिखर गए’। सुनाकर तालियां बटोरी। आबिद हसन वफा ने पढ़ा कि ‘मैं जीता बहुत हूं, वो हारा बहुत है, बुलंदी पे मेरा सितारा बहुत है’। मुस्तकीम रोशन का ये अंदाज भी खूब सराहा गया कि ‘हम तो आए थे दो चार घड़ी बैठेंगे, मेजबां हैं के तकल्लुफ का ठिकाना क्या है’। खुर्रम सुल्तान, साहिल माधोपुरी, वली देवबंदी, मौज सियोहारवी, साबिर बेहटवी, नदीम अनवर देवबंदी, असकरी जैदी गदीरी, अलीम वाजिद, नईम अख्तर, सुहेल आतिर, सुल्ताना जहां, इक़रा नूर व लता साबरी ने भी अपने कलाम पेश किए।