छुटमलपुर में श्रीमदभागवत कथा कहते नवनीत डोभाल। संवाद
छुटमलपुर। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक व्यास आचार्य पंडित नवनीत डोभाल ने राजा परीक्षित के प्रसंग, शुकदेव जन्म और कृष्ण-विदुर प्रसंग की कथा का वर्णन किया।
कथावाचक नवनीत डोभाल ने बताया कि राजा परीक्षित ने एक बार ऋषि समीक से जल मांगा था, लेकिन ऋषि ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे क्रोधित होकर राजा ने उनके गले में मृत सर्प डाल दिया। इस घटना के बाद ऋषि के पुत्र ने राजा को श्राप दिया कि सात दिन में तक्षक नाग उन्हें डस लेगा। राजधानी में पहुंचने पर राजा परीक्षित को अपने उस निंदनीय कर्म के लिए बड़ा पश्चाताप हुआ। वह आसक्ति का त्याग करके भगवान श्रीकृष्ण के चरणकमलों की सेवा को ही सर्वोपरि मानकर आमरण अनशनव्रत लेकर वे गंगातट पर बैठ गए। महाराज श्री ने बताया कि मत्यु के समय कोई काम नहीं आता है। इसलिए मनुष्य को समय रहते ही भगवान श्रीकृष्ण के चरणों का आश्रय लेना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने भगवान कृष्ण का विदुर के घर साग खाने का प्रसंग, कर्दम ऋषि और देवहूति की कथा भी सुनाई। कथावाचक ने श्रोताओं को भगवान का चिंतन करने और भक्ति के मार्ग पर चलने की सलाह दी। कथा के यज्ञमान बबलू धीमान और उनकी पत्नी सविता धीमान रहे। नीरज गोयल, कांता बंसल, लता कांबोज, अनिता धीमान, ललिता गुप्ता, श्वेता गोयल, सरीता गोयल, करीश्मा बड़थवाल, वीरेंद्र सिंह आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।