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13 सचिवों के खिलाफ होगी विभागीय कार्रवाई

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सहारनपुर। सहकारी समितियों से यूरिया बिक्री में हुई गड़बड़ी के मामले की जांच पूरी हो गई है। जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित टीम ने जांच करके रिपोर्ट भेज दी, जिसके बाद जिलाधिकारी ने सहकारी समितियों के 13 सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा है। वहीं, देवबंद के एक निजी उर्वरक विक्रेता के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है।
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दरअसल, किसानों को जरूरत से ज्यादा यूरिया दिए जाने का मामला पड़ोसी जिलों में उजागर हुआ था। इसी को देखते हुए शासन ने गंभीरता से जांच कराने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने टीम गठित की, जिसके बाद जांच शुरू हुई। उसमें पता चला कि सहकारी समितियों से लॉकडाउन के दौरान बगैर ई पॉश मशीन के किसानों को यूरिया दिया गया, क्योंकि उस समय कोविड 19 संक्रमण को देखते हुए ई पॉश मशीनों का प्रयोग रोक दिया गया था। मगर लॉकडाउन समाप्त होने के बाद पुन: ई पॉश से ही यूरिया बिक्री होनी थी। बावजूद इसके सहकारी समितियों से बगैर ई पॉश के यूरिया की बिक्री की गई। यूरिया बिक्री के ईपॉश से जुड़े केंद्रीकृत सिस्टम में यह पता चला कि एक एक किसान को 200 से 250 बैग यूरिया तक दे दिया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि रजिस्टर में यूरिया खरीदने वाले किसानों के नाम लिखे गए। सहारनपुर जिले में 13 समितियों पर इस तरह की लापरवाही सामने आई। जिसके चलते इन सभी 13 समितियों के सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी ने शासन को पत्र लिखा है।
कैश मेमो जिसके नाम काटी, उसने खरीदा ही नहीं यूरिया
देवबंद के एक निजी उर्वरक विक्रेता के यहां से यूरिया बिक्री को लेकर हुई जांच में यह भी पता चला कि एक किसान के नाम से 148 बैग यूरिया बिक्री का कैश मेमो काटा गया। जब किसान से पूछा, तो उसने साफ कह दिया कि मैंने यूरिया खरीदा ही नहीं।
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यूरिया बिक्री में ई पॉश मशीन का प्रयोग नहीं करने और रजिस्टर में ही एंट्री करने की पुष्टि जांच में हुई है, जबकि ई पॉश मशीन से ही यूरिया बिक्री होना है। इसलिए सहकारी समितियों के 13 सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है। -- अखिलेश सिंह, जिलाधिकारी
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