सहारनपुर के देवबंद में गंगा-जमुनी तहजीब वाली सहारनपुर जनपद की देवबंद विधानसभा सीट पर इस बार मुद्दा केवल पानी का होगा, क्योंकि हिंडन नदी का प्रदूषित पानी पिछले एक दशक के दौरान करीब 250 लोगों की जिंदगी निगल चुका है।
जबकि 12 गांव के लोग 20 सालों से सिंचाई के पानी को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ आश्वासन की ही डोज मिली है। समस्या का किसी ने समाधान नहीं कराया।
देवबंद विधानसभा के लगभग 21 गांव हिंडन नदी के प्रदूषित पानी से परेशान हैं। एक दशक के दौरान 250 से अधिक लोग कैंसर, पीलिया, चर्मरोग आदि जानलेवा बीमारियों से दम तोड़ चुके हैं।
हिंडन में बहने वाले बदबूदार झागयुक्त दूषित पानी ने करीब 120 फीट की गहराई तक भूजल स्तर को प्रदूषित कर दिया है। दूसरे करीब 12 गांव के लोग सिंचाई का पानी नहीं मिलने से परेशान हैं।
इस विकट समस्या को लेकर ग्रामीण चुनाव बहिष्कार करने का निर्णय ले चुके हैं। ग्रामीणों की माने तो तहसील दिवस से लेकर प्रदेश, केंद्र सरकार तक वह गुहार लगा चुके है। परंतु कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला है।
हिंडन के प्रदूषित पानी से हो रही मौतों से परेशान क्षेत्र की जनता ने बाबा मंगल गिरी व बाबा दर्शन सिंह के नेतृत्व में वर्ष 2014 में शिमलाना स्थित शिव मंदिर में नदी बचाओ आंदोलन के तहत भूख हड़ताल की थी।
क्षेत्रीय विधायक व तत्कालीन मंत्री राजेंद्र सिंह राणा ने बाबा को नदी में बहने वाले पानी को ट्रीटमेेंट प्लांट लगाकर स्वच्छ कराने एवं नदी प्रभावित गांव में पीने के लिए पानी की टंकी बनवाने का आश्वासन दिलाकर नौ दिन बाद अनशन समाप्त कराया था।
लेकिन एक साल बाद भी कुछ नहीं होने पर बाबा मंगल गिरी ने 2015 में भगवानपुर स्थित औघड़नाथ मंदिर में फिर भूख हड़ताल शुरू की।
यहां भी आठ दिन बाद तत्कालीन एडीएम ई दिनेश चंद्रा, एसडीएम रामपुर और सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने अनशनकारी बाबा को आश्वासन दिलाकर उनका अनशन समाप्त करा दिया था। लेकिन समस्या अभी तक जस की तस बनी हुई है।
लिंक नहर नल्हेड़ा रजवाहे से सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने के कारण 12 गांव के किसान परेशान हैं। जिनमें जड़ौदापांड़ा, शेरपुर, किशनपुरा, लौटनी, जयपुर, घिसरपड़ी, बालूमाजरा, मौरा, उमरी मजबता बडृली नयागांव शामिल हैं।