ईद-उल- फितर पर उलमा के बाद अब ईदगाह वक्फ कमेटी ने भी लोगों से ईदगाह के बजाए मोहल्ले की मस्जिद या घरों में सीमित संख्या में जमात कर नमाज अदा करने की सलाह दी है।
दारुल उलूम के कार्यवाहक मोहतमिम कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी, दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम, वक्फ कमेटी के उपाध्यक्ष मौलाना सुफियान कासमी, ईदगाह के मुतवल्ली व कमेटी के सचिव मौलवी अनस सिद्दीकी ने कहा कि कोरोना के बढ़ते कहर के मद्देनजर सुरक्षात्मक कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है। शरीयत में भी साफ है कि जिंदगी की हिफाजत करना हमारा फर्ज है। इसलिए सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा न करें। बेहतर है की मस्जिदों या घरों में सीमित संख्या वाली छोटी-छोटी जमातों के साथ ईद की नमाज अदा की जाएं। कोरोना गाइडलाइन का पालन करना बेहद जरूरी है।
वक्फ कमेटी के मुतवल्ली व सचिव मौलवी अनस सिद्दीकी ने कहा कि वर्तमान स्थिति में ईदगाह में जमात के साथ ईद की नमाज अदा करना मुमकिन नहीं है। वहीं, मौलाना सुफियान कासमी ने बताया कि इस बार एक आदमी का सदका-ए-फितर 36 रुपये रखा गया है। जिसे ईद की नमाज से पहले अदा किया जाना जरूरी है। मुफ्तियों ने यह भी कहा है कि ईद की नमाज अदा न कर पाने की सूरत में नमाज-ए-चाश्त अदा की जा सकती है।