सहारनपुर। प्रदेश सरकार ने कोरोना को लेकर प्रदेश में धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। लेकिन सीएए के खिलाफ सहारनपुर जनपद के देवबंद में चल रहा धरना प्रशासन के लिए गले की फांस बन गया है। धरने पर बैठी महिलाओं और लोगों का कहना है कि कोरोना से उन्हें डर नहीं लगता बल्कि ये कानून कोराना से कहीं ज्यादा भारी पड़ेगा। एक ओर कानून को वापस लेने का प्रदर्शन तो दूसरी ओर प्रशासन की ओर से धरने से उठाने के तमाम जतन शुरू किए गए हैं।
कोरोना को लेकर देशभर में अलर्ट घोषित है। प्रदेश सरकार भी कोरोना पर एहतियात को लेकर कई कदम उठा रही है। सूबे में धरना-प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, लेकिन देवबंद में चल रहे 51 दिन से धरने पर इसका कितना असर होता है, यह देखने वाली बात होगी। देवबंद में धरना-प्रदर्शन पर महिलाएं, पुरुष और बच्चे शिरकत कर रहे हैं। महिलाएं डटी हुई हैं। कोरोना का डर उन पर नजर नहीं आ रहा है, प्रशासन की चिंता यही है कि कहीं इस भीड़ में किसी तरह की आपात स्थिति पैदा हो जाए तो फिर उसे संभालना मुश्किल होगा। इसलिए प्रशासन की ओर से देवबंद के प्रमुख उलमा सहित प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के अफसरों से समन्वय बनाकर धरना दे रहे लोगों को समझाने की रणनीति बनाई है। रणनीति के तहत धरना-प्रदर्शन को फिलहाल स्थगित कराने की कोशिश प्रशासन कर रहा है।
कोरोना एक वैश्विक आपदा बन चुकी है। देवबंद में जो धरना-प्रदर्शन चल रहा है। उन्हें समझाया-बुझाया जा रहा है। किसी तरह की विकट स्थिति पैदा नहीं हो। इसलिए सभी से धरने को स्थगित करने का आह्वान किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी और धर्मगुरु इस ओर प्रयासरत हैं। जहां तक कानून की बात है तो आपदा के दौरान एपेडेमिक एक्ट प्रभावी रहता है। जिसमें कई प्रभावी कानूनी प्रावधान है। जिसके तहत कानून अपना कार्य कर सकता है। फिर भी हम चाहते हैं कि सभी लोग अपने, परिवार और समाज के प्रति जागरूक बने।
संजय कुमार, कमिश्नर, सहारनपुर मंडल।