जिले में महज दो दिनों में दो बच्चों, एक किशोरी और दो महिलाओं समेत आठ और मरीजों की जिंदगी जानलेवा बुखार ने छीन ली। इनमें चार मौतें रामपुर मनिहारान और अन्य चार मौतें गंगोह क्षेत्र में हुई हैं। इनके अलावा दर्जनों अन्य मरीज जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। बुखार के इस कहर से सभी दहशत में हैं।
रामपुर मनिहारान के मोहल्ला पीपलतला निवासी 28 वर्षीय अरशद को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। कस्बे की ही पांच वर्षीय कशिश को भी कुछ दिन बुखार के बाद जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। यहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। उसके पिता मुकर्रम ने कहा पहले तो बेटी को वहीं दिखाते रहे। यहां लाए तो अब उसकी जान चली गई।
मोहल्ला पीरबनी निवासी आमिर के दो वर्षीय पुत्र अल्तमश को एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। इसका इलाज स्थानीय निजी चिकित्सक के यहां चल रहा था। वह भी जिंदगी की जंग हार गया। मोहल्ला बंजारान निवासी 70 वर्षीय शौकत ने भी बुखार से जूझते हुए दम तोड़ दिया। कस्बे में इन मरीजों की मौत के अलावा पीपलतला निवासी शोएब, सरफराज, बंजारान निवासी राहत, जीशान, शालू, खालिक, तनवीर, मोनू भी बुखार से जूझ रहे हैं।
उधर, गंगोह में कुंडा कलां के बाद अन्य गांवों में बुखार लोगों की जान ले रहा है। गांव रादौर निवासी राजेश की 16 वर्षीय पुत्री मीनू कक्षा 11 में पढ़ती थी। दो दिन पूर्व उसे तेज बुखार होने पर परिजनों ने पहले गांव और उसके बाद करनाल में चिकित्सक से उपचार कराया था। आराम ना होने पर उसे मुलाना मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। वहां शनिवार रात उसकी मौत हो गई। गांव मुबारिकपुर निवासी 50 वर्षीय दर्शन देवी को दो दिन से बुखार आ रहा था। रविवार को उसकी भी मौत हो गई। इसी गांव की चरण सिंह की पत्नी 40 वर्षीय ऊषा को भी चार दिन पूर्व बुखार आने पर देहरादून स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वहां शनिवार को उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इनके अलावा गांव अलीपुरा निवासी नवाब के 16 वर्षीय पुत्र दीपक को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। परिजनों ने उसका अंबेहटा और सहारनपुर में इलाज कराया, लेकिन जब उसकी हालत में कोई सुधार नही हुआ तो परिजनों ने युवक को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया। दो दिन भर्ती रखने के बाद पीजीआई में बताया गया कि बुखार बच्चे के दिमाग में पहुंच गया है। अब इसका इलाज कर पाना मुश्किल है। परिजन उसे लेकर लौट आए। लेकिन शुक्रवार देर रात ही उसने आखिरी सांस ली। इसके अलावा गंगोह क्षेत्र के अन्य कई इलाकों में मरीज बुखार से जूझ रहे हैं।